लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चंदे से जुड़े विवाद, मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले और अब ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी से जुड़ी कथित अनियमितताएं सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने मनरेगा के बाद लाई गई वीबी-जी राम जी योजना में डिजिटल हाजिरी के कथित फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मनरेगा के बाद नई योजना में भी गड़बड़ी का आरोप
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि यूपीए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और मजदूरों का पलायन रोकने के उद्देश्य से मनरेगा कानून बनाया था। इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को आजीविका का सहारा देने के साथ सरकार की जवाबदेही भी तय की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने योजना का नाम बदल दिया, लेकिन अब नई व्यवस्था में भी कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि गरीब मजदूरों के रोजगार और मजदूरी से जुड़े मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
11 जिलों में डिजिटल हाजिरी पर उठाए सवाल
आराधना मिश्रा मोना ने अयोध्या, संभल, रामपुर, हरदोई, गाजीपुर, देवरिया, महराजगंज, चंदौली, गाजियाबाद, बहराइच और जालौन से जुड़ी शिकायतों और रिपोर्टों का हवाला देते हुए डिजिटल हाजिरी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि बारिश और जलभराव के दौरान बड़ी संख्या में मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होने के मामलों का वास्तविक कार्यस्थलों से मिलान कराया जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से दिए गए विवरण के मुताबिक, अयोध्या में 25 से 27 सितंबर के बीच 1,124 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होने और संभल में 5,587 मजदूरों की हाजिरी से जुड़े मामलों में कथित गड़बड़ियों के आरोप हैं।
रामपुर और हरदोई में भी खराब मौसम के दौरान दर्ज उपस्थिति की जांच की मांग की गई। गाजीपुर में 26 और 27 सितंबर तथा 2 अक्टूबर को दर्ज मजदूरों की उपस्थिति पर सवाल उठाए गए। वहीं, देवरिया में तीन दिनों के दौरान 13,754 मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने के विवरण का हवाला दिया गया। कांग्रेस ने मांग की कि जांच कर यह पता लगाया जाए कि संबंधित कार्य वास्तव में हुए थे या नहीं और दर्ज उपस्थिति वास्तविक थी या नहीं।
क्लोन ऐप से फर्जी हाजिरी दर्ज करने का भी आरोप
कांग्रेस ने चंदौली, गाजियाबाद और बहराइच में सरकारी एनएमएमएस ऐप से मिलते-जुलते कथित क्लोन ऐप के इस्तेमाल के आरोपों को गंभीर बताया। पार्टी का आरोप है कि पहले से सुरक्षित तस्वीरों के जरिए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने और विभागीय लॉगिन आईडी तथा पासवर्ड का दुरुपयोग करने की कोशिश की गई।
जालौन के कुठौंद ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में अलग-अलग कार्यस्थलों के लिए एक जैसी तस्वीरें अपलोड किए जाने के आरोप भी लगाए गए। कांग्रेस ने मांग की कि तस्वीरों, मस्टर रोल, वास्तविक कार्यस्थलों और मजदूरी भुगतान का तकनीकी सत्यापन कराया जाए, ताकि कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
केंद्र की चेतावनी के बावजूद निगरानी पर सवाल
आराधना मिश्रा मोना ने दावा किया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 8 जुलाई 2025 को डिजिटल हाजिरी में हेरफेर और एनएमएमएस ऐप के दुरुपयोग को लेकर राज्यों को आगाह किया था। उनके मुताबिक, मंत्रालय ने तस्वीरों की प्रामाणिकता, वास्तविक और दर्ज मजदूरों की संख्या में अंतर तथा एक ही तस्वीर के कई मस्टर रोल में इस्तेमाल जैसी विसंगतियों की पहचान की थी।
उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि इन निर्देशों के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए, कितने संदिग्ध मामलों की जांच हुई और कितने मामलों में कार्रवाई की रिपोर्ट केंद्र को भेजी गई। कांग्रेस ने इस संबंध में रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की भी मांग की।
कांग्रेस की मांग- जांच हो, गड़बड़ी मिलने पर वसूली और कार्रवाई हो
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने संबंधित जिलों में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कथित क्लोन ऐप, एपीके फाइल, एक्सेस-की और विभागीय लॉगिन के इस्तेमाल की जांच करने तथा संदिग्ध हाजिरी का वास्तविक काम और मजदूरी भुगतान से मिलान कराने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार धन की वसूली की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। उनके मुताबिक, ग्रामीण रोजगार योजना का उद्देश्य गरीब मजदूरों को काम और आजीविका की सुरक्षा देना है, इसलिए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
प्रेसवार्ता में शिव पाण्डेय, कुंवर सिंह निषाद, प्रियंका गुप्ता, सचिन रावत, सिद्धिश्री, डॉ. अलीमुल्ला खान और मान सिंह चौहान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
