नई दिल्ली: विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए भारत लौटकर मेडिकल प्रैक्टिस करने की प्रक्रिया अहम होती है। आमतौर पर विदेशी मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को भारत में प्रैक्टिस के लिए विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा यानी FMGE की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, कुछ देशों की मेडिकल शिक्षा और डिग्री को लेकर अलग नियम बताए जाते हैं। ऐसे में विदेश में मेडिकल की पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों के लिए देश, डिग्री और भारत में लागू मान्यता संबंधी नियमों की पहले से जांच करना जरूरी है।
अमेरिका में मेडिकल शिक्षा का अलग ढांचा
अमेरिका में भारत की तरह सीधे MBBS की डिग्री नहीं दी जाती। वहां मेडिकल शिक्षा के लिए आम तौर पर पहले चार साल की स्नातक पढ़ाई और उसके बाद चार साल का MD कार्यक्रम करना होता है। इस दौरान छात्रों को व्यापक क्लिनिकल और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया जाता है। खबर में दावा किया गया है कि अमेरिका से मेडिकल शिक्षा हासिल करने वाले डॉक्टरों को भारत में FMGE से छूट मिलती है।
ब्रिटेन में NHS के अस्पतालों में प्रशिक्षण
यूनाइटेड किंगडम में मेडिकल शिक्षा का पाठ्यक्रम आम तौर पर पांच से छह साल का होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को नेशनल हेल्थ सर्विस के अस्पतालों में क्लिनिकल प्रशिक्षण का अवसर मिलता है। ब्रिटेन की मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशिक्षण व्यवस्था को देखते हुए वहां की मेडिकल डिग्री को लेकर भारत में अलग मान्यता व्यवस्था बताई गई है।
कनाडा में पहले स्नातक डिग्री, फिर MD
कनाडा में भी अमेरिका की तरह मेडिकल शिक्षा का ढांचा अलग है। यहां आम तौर पर चार साल की स्नातक शिक्षा के बाद MCAT जैसी प्रवेश प्रक्रिया से गुजरना होता है और फिर चार साल का MD कार्यक्रम किया जाता है। इस तरह मेडिकल शिक्षा पूरी करने में करीब आठ साल लग सकते हैं। कनाडा में छात्रों को मजबूत क्लिनिकल प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल कोर्स और आधुनिक प्रशिक्षण
ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल शिक्षा के लिए करीब पांच से छह साल के कार्यक्रम उपलब्ध हैं। यहां छात्रों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ क्लिनिकल प्रशिक्षण दिया जाता है। खबर में ऑस्ट्रेलिया की मेडिकल डिग्री को भारत में FMGE से छूट वाली डिग्रियों में शामिल बताया गया है।
न्यूजीलैंड में करीब छह साल की मेडिकल पढ़ाई
न्यूजीलैंड में मेडिकल शिक्षा का पाठ्यक्रम लगभग छह साल का बताया गया है। पढ़ाई के दौरान अस्पतालों में व्यावहारिक और क्लिनिकल प्रशिक्षण दिया जाता है। खबर के अनुसार, वहां की MBChB डिग्री को भारत में बिना FMGE प्रैक्टिस के लिए मान्य माना जाता है।
दाखिले से पहले NMC के मौजूदा नियम जरूर जांचें
विदेश में मेडिकल शिक्षा लेने का फैसला करने से पहले छात्रों को केवल किसी देश की डिग्री के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। पाठ्यक्रम, कॉलेज की मान्यता, पढ़ाई की अवधि, क्लिनिकल प्रशिक्षण, फीस और भारत लौटने के बाद पंजीकरण से जुड़े मौजूदा नियमों की आधिकारिक जानकारी लेना जरूरी है। मेडिकल शिक्षा और लाइसेंसिंग से जुड़े नियम समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए दाखिले से पहले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नवीनतम दिशा-निर्देशों की पुष्टि करना छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
