लखनऊ: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर केंद्र सरकार की पहल के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। संविधान (129वां संशोधन) विधेयक-2024 के अध्ययन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की टीम स्टडी विजिट पर लखनऊ पहुंची, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), मुख्य निर्वाचन अधिकारी सहित कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें अमृत अभिजात, संजय प्रसाद, दीपक कुमार और अमित कुमार घोष भी शामिल रहे। बैठक के दौरान एक साथ चुनाव कराने से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और लॉजिस्टिक चुनौतियों समेत विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
राज्य की प्रशासनिक तैयारियों पर हुआ विस्तार से मंथन
बैठक में अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से जुड़ी संभावित चुनौतियों और व्यवस्थाओं पर अपने-अपने विभागों का पक्ष रखा। सुरक्षा, चुनावी संसाधन, प्रशासनिक समन्वय और चुनाव संचालन से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
अनुराग ठाकुर ने बताए ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रमुख फायदे
बैठक को संबोधित करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से राष्ट्रीय संसाधनों की बचत होगी, बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से होने वाली बाधाएं कम होंगी और सरकारों को पूरे कार्यकाल में निरंतर विकास कार्य करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव की व्यवस्था लागू होने से चुनावी खर्च और प्रशासनिक संसाधनों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा, जिससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी।
यूपी के अधिकारियों की भागीदारी की सराहना
बैठक के समापन पर अनुराग ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े राज्य में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण कार्य है और अधिकारियों ने समिति के समक्ष रचनात्मक सुझाव रखे हैं।
संसद में पेश होगी जेपीसी की रिपोर्ट
संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न राज्यों से मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। उत्तर प्रदेश के अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों को भी रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा, जिसे आगे संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
