अब ट्रेनों में भी होगा ‘ब्लैक बॉक्स’ सिस्टम, इंजन में लगेंगे 6 कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर; हादसों की जांच होगी आसान

प्रयागराज: विमान की तरह अब भारतीय रेलवे भी ट्रेनों में ‘ब्लैक बॉक्स’ जैसी निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। उत्तर मध्य रेलवे ने वीडियो सर्विलांस सिस्टम (वीएसएस) का ट्रायल शुरू कर दिया है। पहले चरण में इस सिस्टम को एक लोकोमोटिव (इंजन) में लगाया गया है, जबकि अगले चरण में 26 ट्रेनों में इसका परीक्षण किया जाएगा। इस तकनीक का उद्देश्य रेल हादसों की जांच को अधिक सटीक और तेज बनाना है।

इंजन में लगेंगे 6 हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे

वीडियो सर्विलांस सिस्टम के तहत प्रत्येक इंजन में कुल छह हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें दो कैमरे इंजन के आगे और पीछे लगाए जाएंगे, जो ट्रैक और सामने की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करेंगे।

इसके अलावा चार कैमरे इंजन के केबिन के भीतर लगाए जाएंगे, जो लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।

वॉयस रिकॉर्डर भी करेगा बातचीत रिकॉर्ड

इस नई व्यवस्था में इंजन के अंदर एक वॉयस रिकॉर्डर भी लगाया जाएगा। यह लोको पायलट और सहायक लोको पायलट के बीच होने वाली बातचीत को रिकॉर्ड करेगा, जिससे किसी भी दुर्घटना या असामान्य घटना की स्थिति में जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी।

हादसों की जांच होगी अधिक प्रभावी

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी ट्रेन का एक्सीडेंट होता है या कोई असामान्य घटना सामने आती है, तो कैमरों की रिकॉर्डिंग और वॉयस रिकॉर्डर के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि हादसे से पहले इंजन के भीतर और ट्रैक पर क्या स्थिति थी। इससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलेगी।

लोको स्टाफ की जवाबदेही भी बढ़ेगी

यह प्रणाली केवल दुर्घटनाओं की जांच तक सीमित नहीं रहेगी। ड्यूटी के दौरान लोको पायलट और अन्य कर्मचारियों की गतिविधियां भी रिकॉर्ड होंगी, जिससे कार्यप्रणाली की निगरानी बेहतर होगी और लापरवाही की संभावना कम होने की उम्मीद है।

स्वदेशी तकनीक पर रेलवे का जोर

रेलवे ने इस परियोजना में विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी और अधिक सुरक्षित कैमरा तथा रिकॉर्डिंग तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया है। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी के अनुसार, रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पहले चरण में 26 ट्रेनों में इस तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। ट्रायल सफल रहने पर इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जा सकता है।

 

Related posts