लखनऊ अग्निकांड का दर्दनाक सच! आग और धुएं में घिरे बच्चों की चीखों से दहला शहर, आखिर किसकी लापरवाही बनी मौत की वजह?

लखनऊ: अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत में सोमवार को हुआ भीषण अग्निकांड अपने पीछे कई ऐसे सवाल छोड़ गया है, जिनके जवाब हर कोई तलाश रहा है। सुबह घरों से सपनों के साथ निकले कई छात्र शाम तक इस दुनिया में नहीं रहे। आग, धुएं और अफरा-तफरी के बीच जिंदगी बचाने की जंग लड़ते बच्चों की चीखें पूरे इलाके को दहला गईं। हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि कई अन्य घायल हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही इमारत में भगदड़ मच गई। सबसे अधिक संख्या में छात्र अंदर मौजूद थे, जो अचानक चारों ओर फैलती लपटों और धुएं के बीच फंस गए। जान बचाने के लिए बच्चे इधर-उधर भागते रहे। एक छात्र ने पहली मंजिल से छलांग लगाकर निकलने की कोशिश की, लेकिन नीचे लगी लोहे की ग्रिल पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

धुएं से बचने के लिए बाथरूम में छिपे छात्र

हादसे के दौरान कई छात्रों ने धुएं और आग से बचने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था। लेकिन तेजी से फैलते धुएं ने हालात और भयावह बना दिए। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरें इस त्रासदी की गंभीरता को बयां कर रही हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा कैसे हुई? क्या इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था? क्या संबंधित विभागों और निगरानी एजेंसियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

16 से 24 साल के युवाओं से भरी थी इमारत

जानकारी के अनुसार, इमारत में एक एनिमेशन प्रशिक्षण केंद्र संचालित होता था, जहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए आते थे। अधिकांश छात्रों की उम्र 16 से 24 वर्ष के बीच बताई जा रही है। भूतल पर एक पेंट की दुकान भी संचालित होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। अस्पतालों और घटनास्थल पर पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए भेजा था, वे अब गहरे सदमे में हैं।

कुछ ही मिनटों में आग ने लिया विकराल रूप

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत उसकी चपेट में आ गई। चारों ओर घना धुआं और ऊंची लपटें दिखाई दे रही थीं। शुरुआत में यह चर्चा थी कि इमारत में कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी भी संचालित होती थी, लेकिन बाद में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भवन में केवल भूतल पर पेंट की दुकान और ऊपरी मंजिलों पर एनिमेशन सेंटर संचालित हो रहा था।

उस समय छात्रों के अलावा कुछ कर्मचारी भी भवन के अंदर मौजूद थे। आग लगने के बाद सभी को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई, लेकिन कई लोग धुएं और लपटों में फंस गए।

हादसे की सूचना मिलते ही लौटे सीएम योगी

अग्निकांड की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़ दिया और तुरंत लखनऊ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

इसके बाद मुख्यमंत्री केजीएमयू पहुंचे और वहां भर्ती घायलों से मुलाकात की। उन्होंने हादसे के समय के हालात की जानकारी ली और इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

जांच के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

इस दर्दनाक हादसे के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन मानकों के पालन और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आग कैसे लगी, क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।

 

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