महाराष्ट्र में सियासी भूचाल! उद्धव सेना के कांग्रेस में विलय की चर्चा, ‘ऑपरेशन टाइगर’ से बढ़ी टूट की अटकलें

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक आशीषराव देशमुख के एक दावे ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत पार्टी के कांग्रेस में विलय के पक्ष में हैं। वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों में संभावित बगावत और पाला बदलने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।

भाजपा विधायक का बड़ा दावा

भाजपा विधायक आशीषराव देशमुख ने दावा किया कि महाराष्ट्र की राजनीति में पर्दे के पीछे बड़े स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है। उनका कहना है कि संजय राउत कथित तौर पर चाहते हैं कि शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद और विधायक कांग्रेस में शामिल हो जाएं।

देशमुख ने यह भी दावा किया कि केवल शिवसेना (उद्धव गुट) ही नहीं, बल्कि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भी कांग्रेस में विलय कराने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, इस कथित राजनीतिक फार्मूले के तहत शरद पवार को राज्यसभा में विपक्ष का नेता और उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब राजनीतिक हलकों में संजय राउत के बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

संजय राउत का पलटवार, सांसदों की खरीद-फरोख्त का आरोप

इस बीच संजय राउत ने मंगलवार देर रात एक बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी जा रही है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए अपने पोस्ट में राउत ने लिखा कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जो बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक हैं।

उद्धव गुट में टूट की अटकलें हुईं तेज

पिछले कुछ दिनों से शिवसेना (उद्धव गुट) के कुछ सांसदों के अलग समूह बनाने की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन अटकलों को तब और बल मिला जब सत्तारूढ़ शिवसेना के नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाइक ने संकेत दिया कि यदि कोई सांसद या विधायक पार्टी बदलकर आता है तो उसका स्वागत किया जाएगा।

सरनाइक ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों का अपने नेतृत्व पर भरोसा नहीं है और वे बाल ठाकरे के विचारों में विश्वास रखते हुए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहते हैं, तो शिवसेना के दरवाजे उनके लिए खुले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

दिल्ली की बैठकों से बढ़ी सियासी सरगर्मी

राजनीतिक चर्चाओं को उस समय और हवा मिली जब शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात की। इससे पहले वह मुंबई में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए थे और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया था।

इसके अलावा, पार्टी के नौ सांसदों में से केवल चार सांसदों के बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने से भी राजनीतिक अटकलों को बल मिला। हालांकि संजय राउत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं और पार्टी में किसी तरह की टूट नहीं होने वाली है।

राउत बोले- गलत तस्वीर पेश की जा रही

संजय राउत ने साफ कहा कि मीडिया और राजनीतिक विरोधियों की ओर से गलत तस्वीर पेश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सभी सांसद पार्टी नेतृत्व के साथ हैं और बगावत की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।

महाराष्ट्र की राजनीति में जारी इन घटनाक्रमों के बीच अब सभी की नजरें आने वाले दिनों पर टिकी हैं, क्योंकि संभावित राजनीतिक फेरबदल को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं।

 

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