महंगी होगी हवाई यात्रा! ATF कीमतें बढ़ीं, टिकट पर ‘फ्यूल सरचार्ज’ का झटका

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

आपने टिकट बुक करने के लिए ऐप खोला… किराया देखा… और आंखें खुद-ब-खुद चौड़ी हो गईं! ये कोई बग नहीं है—ये नया ‘एयर टैक्स’ है, जो आपकी जेब पर उतरने वाला है। 1 अप्रैल से उड़ान भरने से पहले आपको एक सवाल जरूर पूछना होगा—“फ्लाइट लूं या बजट बचाऊं?”

1 अप्रैल से ‘महंगी उड़ान’ का काउंटडाउन

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने साफ संकेत दे दिए हैं—एयर ट्रैवल अब सस्ता नहीं रहने वाला। कारण? ATF यानी Aviation Turbine Fuel की कीमतें। हर महीने की पहली तारीख को तय होने वाली इन कीमतों में उछाल ने एयरलाइंस की सांसें फुला दी हैं।

सरकार बातचीत में है… लेकिन बाजार का गणित साफ है—तेल महंगा, तो उड़ान महंगी।

क्यों फट रहा है ‘ईंधन बम’?

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने कच्चे तेल को ‘लक्ज़री आइटम’ बना दिया है। और ATF? वो तो पहले से ही एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्चा—करीब 35–45%। अब इसमें जुड़ गया लंबा रूट। खतरनाक एयरस्पेस से बचने के लिए लंबा रास्ता। ज्यादा ईंधन की खपत। ऊपर से बढ़ती कीमत।

मतलब—एयरलाइंस पर ‘डबल अटैक’

एयरलाइंस का जवाब: ‘सरचार्ज मारो’

एयरलाइंस ने भी साफ कर दिया—घाटा हम नहीं सहेंगे। Air India: ₹399 (डोमेस्टिक), ₹830–₹16,600 (इंटरनेशनल), IndiGo: ₹425–₹2,300, Akasa Air: ₹199–₹1,300

नाम भले ‘फ्यूल सरचार्ज’ हो… लेकिन असल में ये जेब पर सीधा ‘कट’ है।

‘सस्ती उड़ान’ का सपना या मजाक?

कभी कहा गया था—“अब हवाई यात्रा आम आदमी के लिए है।” लेकिन आज हाल ये है कि आम आदमी फिर से ट्रेन की सीट ढूंढ रहा है।

एयरलाइंस का लॉजिक सीधा है खर्च बढ़ा = किराया बढ़ा, नहीं बढ़ाया = घाटा और घाटे में कोई बिजनेस नहीं चलता… चाहे वो आसमान में ही क्यों न उड़ता हो।

एक एविएशन एनालिस्ट ने ऑफ रिकॉर्ड कहा— “भारत में फ्लाइट अब ट्रांसपोर्ट कम और ‘स्टेटस सिंबल’ ज्यादा बनती जा रही है। सरकार कहती है किराया कंट्रोल में है… एयरलाइंस कहती हैं हम मजबूर हैं… और यात्री? वो बस स्क्रीन पर बढ़ते दाम देखकर ‘रीफ्रेश’ करता रह जाता है—जैसे कीमतें कम हो जाएंगी!”

आपकी जेब पर कितना असर?

अगर आप अप्रैल में ट्रैवल प्लान कर रहे हैं ₹400–₹2000 तक अतिरिक्त खर्च (डोमेस्टिक), इंटरनेशनल में हजारों का झटका और ये सिर्फ शुरुआत है…अगर तेल और चढ़ा—तो टिकट भी ‘रॉकेट मोड’ में जाएंगे।

उड़ान से पहले ‘बजट चेक’ जरूरी

अब फ्लाइट बुकिंग सिर्फ डेट और टाइम नहीं… इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी बन चुकी है। कब बुक करें, कौन सी एयरलाइन लें, कितना सरचार्ज लगेगा। वरना एक छोटी ट्रिप भी ‘मिनी फाइनेंशियल क्राइसिस’ बन सकती है।

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