
भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ एक ऐतिहासिक मोड़ पर खत्म हुआ। दुनिया के 88 देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ पर सहमति जताई।
यह केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि AI governance की दिशा में global roadmap माना जा रहा है। खास बात यह रही कि पिछले साल Paris में हुए सम्मेलन में जिन देशों ने सहमति नहीं दी थी, वे इस बार भारत के नेतृत्व में एक मंच पर आए।
New Delhi Declaration क्या है?
‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ का मुख्य फोकस AI का “democratization” है यानी Artificial Intelligence कुछ बड़ी tech कंपनियों या प्रभावशाली देशों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
घोषणापत्र के तहत ‘Democratic Diffusion Charter’ जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य AI के बुनियादी संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है। भारत ने स्पष्ट किया है कि AI केवल profit engine नहीं, बल्कि public good भी होना चाहिए।
Global AI Commons: सुरक्षा और विज्ञान पर जोर
इस समझौते के तहत ‘Global AI Impact Commons’ और ‘Trusted AI Commons’ जैसे साझा मंच तैयार किए जाएंगे। इनका उद्देश्य AI systems की सुरक्षा, reliability और best practices का अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है।
साथ ही, ‘International Network of AI for Science Institutions’ के जरिए वैश्विक वैज्ञानिक संस्थानों को जोड़कर research collaboration को बढ़ावा दिया जाएगा। AI के कारण बदलती jobs landscape को देखते हुए reskilling और skill development पर भी guiding principles तय किए गए हैं।
EU की हिचकिचाहट, फिर सहमति
सूत्रों के अनुसार शुरुआत में European Union ने घोषणापत्र के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि कुछ प्रावधान United Nations के चार्टर से मेल खाते हैं। लेकिन भारत को एक अहम व्यापारिक और रणनीतिक सहयोगी मानते हुए EU अंततः सहमत हो गया।
Diplomacy में इसे “consensus building masterclass” माना जा रहा है।

जीत बड़ी, चुनौती उससे बड़ी
88 देशों के हस्ताक्षर अपने आप में एक बड़ी सफलता है। लेकिन असली परीक्षा implementation की होगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक (voluntary) हैं। यानी कानूनी बाध्यता कम और नैतिक प्रतिबद्धता ज्यादा है। यानी फिलहाल AI governance का यह मॉडल “moral pressure diplomacy” पर आधारित है।
AI लोकतंत्र या Digital Diplomacy?
भारत ने AI को लोकतांत्रिक बनाने की बात कही है सुनने में idealistic लगता है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या Big Tech कंपनियां इतनी आसानी से अपना monopoly advantage छोड़ देंगी?
AI का लोकतंत्रीकरण एक noble goal है, पर ground reality में computing power, data access और funding अभी भी कुछ देशों और कंपनियों के हाथ में केंद्रित है। फिर भी, भारत ने narrative shift जरूर कर दिया है AI अब केवल Silicon Valley का विषय नहीं, बल्कि South Asia की भी आवाज है।
India AI Impact Summit ने यह दिखाया कि भारत केवल technology adopter नहीं, बल्कि global tech rule-maker बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 88 देशों का समर्थन कूटनीतिक जीत है। अब देखना होगा कि यह दस्तावेज़ future policy में कितना translate होता है।
AI के इस नए दौर में भारत ने कम से कम इतना तो साबित कर दिया है “Code भी हमारा, Consensus भी हमारा।”
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