किताब छपी नहीं, संसद थमी नहीं! Budget Session बना Political Thriller

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

संसद का बजट सत्र 9 मार्च तक स्थगित हो चुका है, लेकिन सियासी तापमान अभी भी हाई है। गतिरोध की शुरुआत तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने पूर्व आर्मी चीफ M. M. Naravane की किताब का जिक्र किया।

बीजेपी ने सवाल उठाया, “जब किताब आधिकारिक तौर पर आई ही नहीं, तो उसका कंटेंट सदन में कैसे पहुंच गया?” यहीं से शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर, जो 10 दिनों तक संसद की कार्यवाही पर हावी रहा।

बीजेपी का पलटवार: “सदन में झूठ पीड़ादायक”

बीजेपी सांसद Ravi Shankar Prasad ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सदन के पटल पर अप्रमाणित बात रखना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि सदन में स्पीकर के प्रति असम्मानजनक भाषा का प्रयोग हुआ, प्रधानमंत्री की कुर्सी को घेरने जैसी घटनाएं हुईं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्यवधान डाला गया।

उनका कहना था कि “लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, लेकिन अराजकता नहीं।”

वंदे मातरम पर नई बहस

विवाद यहीं नहीं रुका। रविशंकर प्रसाद ने ‘वंदे मातरम’ के मुद्दे पर सीधा सवाल दाग दिया, क्या पूरा गीत गाया जाना चाहिए या नहीं? यह मुद्दा केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीकवाद से भी जुड़ा है। स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और आज की राजनीति के बीच यह बहस एक बार फिर सुर्खियों में है।

पीएम मोदी की अनुपस्थिति पर विपक्ष का वार

विपक्ष ने यह भी मुद्दा उठाया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण देने लोकसभा में उपस्थित नहीं हुए। इसे विपक्ष ने राजनीतिक संदेश के रूप में देखा, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सामान्य संसदीय प्रक्रिया बताया।

“Budget Session का स्क्रिप्ट अगर OTT पर चला दिया जाए तो नाम होगा — ‘The Unpublished Book & The Political Storm’। Trailer में सिर्फ एक लाइन — ‘किताब छपी नहीं, बहस थमी नहीं!’”

यह विवाद सिर्फ एक किताब या बयान तक सीमित नहीं है। यह सत्ता और विपक्ष के बीच भरोसे की कमी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और संसदीय आचरण पर उठते सवालों का प्रतिबिंब है।

आने वाले सत्र में क्या गतिरोध खत्म होगा या नया मुद्दा सुर्खियों में आएगा? फिलहाल राजनीति की पिच पर बाउंसर लगातार फेंके जा रहे हैं।

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