मजहब पीछे छूटा, इंसानियत आगे आई… हापुड़ से दिल छू लेने वाली तस्वीर

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के मोहल्ला कोटला सादात से सामने आई यह खबर सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि समाज के लिए आईने जैसी है। सोमवार को स्थानीय निवासी अर्जुन की रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। खबर मिलते ही घर में मातम छा गया और पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया।

जब मजहब नहीं, इंसानियत ने थामा हाथ

दुख की इस घड़ी में मोहल्ले के मुस्लिम युवकों ने वह कर दिखाया, जो आज के दौर में सुर्खियों से कहीं बड़ा है। उन्होंने न सिर्फ अंतिम संस्कार की तैयारियों में सहयोग किया, बल्कि अर्जुन की अर्थी को कंधा देकर यह साबित कर दिया कि इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता।

जहाँ सोशल मीडिया पर नफरत ट्रेंड करती है, वहाँ कोटला सादात ने भाईचारे को ट्रेंड बना दिया।

श्मशान तक साथ चला भाईचारे का कारवां

अंतिम यात्रा के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ श्मशान घाट तक पहुंचे। गम का माहौल था, लेकिन उस गम में भरोसे और आपसी सम्मान की रौशनी भी साफ दिखाई दे रही थी। यह दृश्य अपने आप में गंगा-जमुनी तहजीब का लाइव उदाहरण बन गया।

स्थानीय लोगों ने कहा – यही असली भारत है

इलाके के बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की खुलकर तारीफ की। लोगों का कहना था, “धर्म से ऊपर इंसानियत और मुसीबत में साथ खड़े रहना ही सच्चा समाज बनाता है।”

नफरत के शोर में उम्मीद की आवाज

जब देश में अक्सर बंटवारे और नफरत की खबरें हावी रहती हैं, तब कोटला सादात की यह घटना याद दिलाती है कि ज़मीन पर आज भी इंसानियत जिंदा है। यह कहानी किसी राजनीतिक भाषण से नहीं, बल्कि आम लोगों के आचरण से लिखी गई है।

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