
महोबा में जल जीवन मिशन अब सिर्फ पानी की योजना नहीं रही, बल्कि भाजपा के भीतर सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। यूपी के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच शुरू हुआ विवाद अब और गहराता जा रहा है।
अब इस सियासी जंग में एंट्री हुई है पूर्व सांसद और विधायक के पिता गंगाचरण राजपूत की, जिन्होंने खुलकर मंत्री पर अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदार बयानबाजी के आरोप लगाए हैं।
‘विधायक को नोटिस तो मंत्री को भी’
पार्टी द्वारा बेटे को नोटिस दिए जाने से नाराज़ गंगाचरण राजपूत ने साफ शब्दों में कहा, अगर विधायक को नोटिस मिला है, तो मंत्री को भी मिलना चाहिए।
उनका तर्क है कि बुंदेलखंड में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया, गांव दलदल बन गए और जनता परेशान है। ऐसे में विधायक ने जो कहा, वह जनता का गुस्सा और दर्द था, कोई निजी बयान नहीं।
सड़क खुदी, सियासत उफनी
चरखारी क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत हुई खुदाई अब बीजेपी के लिए embarrassment बनती जा रही है। मंत्री का काफिला रोके जाने और सोशल मीडिया पर बयान आने के बाद विवाद ने पार्टी के भीतर दरारें उजागर कर दीं। गंगाचरण का आरोप है कि मंत्री “चापलूसों से घिरे रहते हैं” जो ज़मीनी सच्चाई उन तक पहुंचने ही नहीं देते।
‘ये जाति नहीं, पानी की लड़ाई है’
पूर्व सांसद ने सख्त लहजे में कहा कि इस मुद्दे को जानबूझकर जातिवाद का रंग दिया जा रहा है, जबकि असल लड़ाई पानी और जवाबदेही की है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “20 हजार करोड़ की योजनाएं कागजों में पूरी दिखा देने से गांवों में पानी नहीं आता।”
उनका दावा है कि ठेकेदारों और इंजीनियरों की लापरवाही से मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
BJP में ही रहेगा बृजभूषण
सपा में जाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए गंगाचरण ने कहा कि उनका बेटा हिंदुत्व की राजनीति करता है और भाजपा में ही रहेगा। मुख्यमंत्री को लेकर दिए गए बयान को उन्होंने जुबान फिसलना बताया और माफी की बात भी कही, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि “सच बोलने वालों को चुप कराने से हालात नहीं सुधरेंगे।”
बुंदेलखंड में सवाल ये नहीं कि पानी किसने रोका सवाल ये है कि सच बोलने से किसे डर लग रहा है?
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