कुर्सी से बड़ा संस्कार? UGC विवाद पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने थामा इस्तीफ़ा

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से जुड़ी एक अचानक और चौंकाने वाली खबर ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है

यह इस्तीफा यूजीसी (UGC) से जुड़े हालिया विवाद और शंकराचार्य से जुड़े कथित अपमानजनक घटनाक्रम को लेकर उनकी गहरी नाराज़गी के बाद दिया गया है। यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि वैचारिक और नैतिक असहमति के रूप में देखा जा रहा है।

इस्तीफे के पीछे की वजह

मिली जानकारी के मुताबिक, अलंकार अग्निहोत्री ने अपने त्यागपत्र में संकेत दिया है कि कुछ हालिया फैसलों और घटनाओं से सनातन परंपरा, धार्मिक गुरुओं और बौद्धिक संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंची है।

उनका मानना है कि जब संवैधानिक पदों पर बैठे लोग मौन रहकर असहमति को अनदेखा करते हैं, तो यह भी एक तरह की सहमति बन जाती है।

इसी असहमति को दर्ज कराने के लिए उन्होंने पद छोड़ने का रास्ता चुना।

सिस्टम के भीतर असहज सवाल

यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब देशभर में शिक्षा संस्थानों की भूमिका, अकादमिक स्वतंत्रता और धार्मिक–सांस्कृतिक विमर्श पर बहस तेज है।

अलंकार अग्निहोत्री का फैसला एक uncomfortable सवाल छोड़ता है— क्या नौकरशाही में निजी आस्था और प्रोफेशनल जिम्मेदारी के बीच टकराव की जगह बची है?

प्रशासनिक हलकों में चर्चा

बरेली से लखनऊ तक, यह मामला bureaucratic corridors में hot topic बना हुआ है।

कुछ इसे personal stand मान रहे हैं, तो कुछ इसे symbolic protest बताकर आने वाले समय में और अधिकारियों के लिए एक मिसाल मान रहे हैं।

फिलहाल, राज्य सरकार या प्रशासन की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आमतौर पर अफसर कुर्सी से चिपके रहते हैं, यहां कुर्सी छोड़कर सवाल खड़े किए गए हैं।

आज जब बयान ट्वीट से पहले सोचकर दिए जाते हैं, वहां यह इस्तीफा एक लाउड साइलेंस बनकर सामने आया है। यह कदम चाहे पसंद किया जाए या नहीं, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना अब मुश्किल है।

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