
बिहार की राजनीति में एक बार फिर RJD (राष्ट्रीय जनता दल) सुर्खियों में है। वजह सिर्फ इतनी नहीं कि तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की तैयारी चल रही है, बल्कि उससे पहले ही रोहिणी आचार्य का X (पूर्व Twitter) पोस्ट ऐसा राजनीतिक विस्फोट बन गया, जिसने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया।
रविवार सुबह पटना के होटल मौर्या में RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक होनी थी। अध्यक्षता खुद लालू प्रसाद यादव कर रहे थे। 85 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, प्रदेश अध्यक्ष, सांसद, विधायक—सब मौजूद थे। लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही रोहिणी आचार्य का पोस्ट पार्टी की “लाइन” से ज्यादा “लड़ाई” पर चर्चा का विषय बन गया।
‘गिद्धों’ वाला पोस्ट और संकेतों की राजनीति
रोहिणी आचार्य ने नाम लिए बिना पार्टी के भीतर मौजूद कुछ लोगों पर बेहद तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि जो “सच्चा लालूवादी” होगा, वही पार्टी की मौजूदा बदहाली के जिम्मेदार लोगों से सवाल करेगा। पोस्ट में “घुसपैठिए”, “साजिशकर्ता” और “फासीवादी ताकतों के भेजे लोग” जैसे शब्दों ने साफ कर दिया कि निशाना सिर्फ बाहर नहीं, अंदर भी है।
राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को सीधे-सीधे तेजस्वी यादव की टीम और मौजूदा नेतृत्व संरचना से जोड़कर देखा जा रहा है। समीक्षा छोड़कर पहले “गिद्धों” को हटाने की सलाह, दरअसल नेतृत्व परिवर्तन से पहले की चेतावनी मानी जा रही है।
RJD में बदलाव या बिखराव?
तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाना RJD के लिए संगठनात्मक मजबूती का कदम बताया जा रहा है। लेकिन सवाल ये है—क्या पार्टी पहले से ही दो धड़ों में बंट चुकी है? एक तरफ ‘नई पीढ़ी की राजनीति’ का दावा, दूसरी ओर ‘लालूवाद की शुद्धता’ की लड़ाई।

रोहिणी का आरोप है कि पार्टी की असली कमान उन लोगों के हाथ में है, जो लालू प्रसाद यादव की विचारधारा को कमजोर करने के लिए अंदर से काम कर रहे हैं। यह बयान सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि पावर स्ट्रक्चर पर सीधा हमला है।
चुप्पी भी एक संदेश
रोहिणी आचार्य ने यह भी लिखा कि सवालों से बचना, जवाब न देना और आलोचकों के साथ अभद्र व्यवहार करना, अपने-आप में साजिश की पुष्टि करता है। राजनीति में अक्सर चुप्पी को रणनीति कहा जाता है, लेकिन यहां चुप्पी आरोप बनती दिख रही है।
RJD कभी “जन-जन की पार्टी” कही जाती थी। आज वही पार्टी खुद यह तय करने में उलझी है कि लालूवाद कौन तय करेगा—विचारधारा या लॉबी? तेजस्वी का कद बढ़ रहा है, लेकिन सवाल ये है कि क्या पार्टी का दिल भी उनके साथ धड़क रहा है?
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