
भारत को आज़ाद हुए लगभग आठ दशक बीत चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के गढ़रियनपुरवा गांव ने सोमवार को पहली बार बिजली की रोशनी देखी। जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में जैसे ही सप्लाई चालू हुई, पूरा इलाका तालियों और मुस्कान से गूंज उठा।
गांव में उत्सव, आंखों में नमी
बिजली आने के साथ ही गांव में किसी त्योहार जैसा माहौल बन गया। बच्चे खुशी से उछल पड़े तो बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं। ग्रामीण रोहित पाल कहते हैं,
“यह हमारे लिए आज़ादी का असली दिन है। अंधेरे की वजह से यहां रिश्ते तक नहीं टिकते थे।”
बिजली नहीं, तो शादी भी नहीं!
ग्रामीणों के मुताबिक बिजली न होने से लड़कों-लड़कियों की शादी में बड़ी दिक्कत आती थी। रिश्ता तय होने से पहले ही लोग गांव का हाल देखकर लौट जाते थे। महिलाओं ने बताया कि बच्चे दीये और मोमबत्ती की कमजोर रोशनी में पढ़ने को मजबूर थे।
2017 में लगे खंभे, 2026 में आई रोशनी
चौंकाने वाली बात यह है कि गांव में 2017 में बिजली के खंभे तो लग गए थे, लेकिन तार खिंचने और कनेक्शन मिलने में करीब 9 साल लग गए। इस लंबे इंतजार में कई बुजुर्ग ऐसे भी रहे जो बिजली देखने की आस में दुनिया से विदा हो गए।

वन विभाग बना सबसे बड़ी बाधा
मौके पर पहुंचे सपा सदर विधायक सुरेश यादव ने बताया कि गांव का कुछ हिस्सा वन विभाग के अंतर्गत आने के कारण काम अटका रहा। प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के बाद अब जाकर समाधान निकला।
उन्होंने जिलाधिकारी, डीएफओ और बिजली विभाग के अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा— “यह सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि गांव की जिंदगी बदलने वाली रोशनी है।”
देश चांद पर पहुंच गया, लेकिन गांव तक बल्ब पहुंचने में 77 साल लग गए। सवाल ये है— अब भी कितने गांव अंधेरे में हैं?
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