
पिछले एक साल में इजरायल की सैन्य क्षमता पूरी दुनिया के सामने आई है। एक तरफ गाज़ा में हमास, दूसरी ओर ईरान की छाया में पल रहे आतंकी नेटवर्क—दोनों मोर्चों पर इजरायल ने नुकसान झेलते हुए भी कदम पीछे नहीं खींचे।
गाज़ा में हमास का नेटवर्क तोड़ा गया, वहीं ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर इजरायल की नजर लगातार बनी हुई है।
5 साल से सिर्फ Air War
2020 के बाद दुनिया ने जितने भी बड़े संघर्ष देखे, वे ज़्यादातर हवाई युद्ध रहे— ड्रोन हमले, रॉकेट सैल्वो, मिसाइल स्ट्राइक। यही वजह है कि आज हर देश की रेस Air Defence System पर आकर टिक गई है। इस रेस में इजरायल और भारत सबसे आगे दिख रहे हैं।
Iron Dome के बाद अब Iron Beam
अब इजरायल एक कदम और आगे बढ़ चुका है। डिफेंस एक्सपर्ट Dr. Daniel Gold के नेतृत्व में इजरायल ने दुनिया को दिया है — Laser-Based Air Defence System – Iron Beam
यह सिस्टम पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर से अलग है। यह लेजर बीम से दुश्मन के ड्रोन, रॉकेट और शेल को हवा में ही जला देता है।
Daniel Gold का दावा
इजरायल के Defence R&D Directorate के प्रमुख डैनियल गोल्ड कहते हैं—
“आज के युद्धों में सबसे बड़ा खतरा ड्रोन स्वार्म अटैक है। Iron Beam ऐसे हमलों के लिए ही बनाया गया है।”
एक साथ उड़ते कई ड्रोन— Iron Beam उन्हें सेकंडों में खत्म कर सकता है। प्रति शॉट लागत लगभग नगण्य। मौसम और दूरी पर लगातार काम।

Drone Swarm = सबसे बड़ा खतरा
आज ड्रोन सिर्फ निगरानी नहीं, घातक हथियार बन चुके हैं। झुंड में हमला करने वाले ड्रोन को रोकना पारंपरिक सिस्टम के लिए महंगा और कठिन होता है। यहीं पर Laser Defence पूरी जंग का गणित बदल देता है।
Multi-Layer Defence पर फोकस
इजरायल सिर्फ Iron Beam पर नहीं टिका है। उसका डिफेंस नेटवर्क अब तीन लेयर में काम करता है:
- Iron Dome – रॉकेट्स
- David’s Sling – मीडियम रेंज मिसाइल
- Arrow System – बैलिस्टिक मिसाइल
- Iron Beam – ड्रोन और सस्ते हवाई हथियार
यानी अब आसमान से आने वाला खतरा, चारों तरफ से घिर चुका है।
जहां दुनिया अभी भी मिसाइलों पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं इजरायल ने साफ संदेश दे दिया है— “Future wars will be fought at the speed of light.”
समीक्षा बाद में, गिद्ध पहले! रोहिणी आचार्य का तेजस्वी पर तंज
