‘होटल मोड’ ऑन! शिंदे के पार्षद रिसॉर्ट में, असली राजनीति अभी बाकी

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

बीएमसी चुनाव में एनडीए की निर्णायक बढ़त के बाद मुंबई की राजनीति ने एक बार फिर जाना-पहचाना रास्ता पकड़ लिया है — रिजॉर्ट पॉलिटिक्स
उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) ने साफ संकेत दे दिया है कि चुनावी नतीजे भले आ गए हों, लेकिन “असली राजनीति अभी शुरू होना बाकी है.”

ठाकरे परिवार को झटका, BJP सबसे आगे

बीते तीन दशकों से बीएमसी पर ठाकरे परिवार का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है।
भाजपा सबसे ज्यादा 89 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है — जो उद्धव ठाकरे के लिए सीधा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

सबकी नजर शिंदे गुट पर क्यों?

चुनाव नतीजों के बाद सियासी हलकों की निगाहें टिक गई हैं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर। शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं और वह भाजपा की सहयोगी भी है। इसके बावजूद, शिंदे गुट ने अपने पार्षदों को पांच सितारा होटल में शिफ्ट करना शुरू कर दिया।

जहां बहुमत पक्का हो, वहां भी AC कमरे क्यों चाहिए — यही है मुंबई की राजनीति!

BMC का गणित क्या कहता है?

227 वार्ड वाली बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है।

BJP: 89 सीटें, Shiv Sena (Shinde): 29 सीटें, कुल: 118 सीटें (स्पष्ट बहुमत) इसके अलावा, NCP (Ajit Pawar) को 3 सीटें मिली हैं और उनके समर्थन की उम्मीद भी महायुति को ही है।

Opposition की ताकत कितनी?

  • Shiv Sena (UBT): 65
  • MNS: 6
  • NCP (Sharad Pawar): 1 कुल: 72

कांग्रेस (24), AIMIM (8) और SP (2) को जोड़ें तो विपक्ष 106 तक पहुंचता है — बहुमत से सिर्फ 8 कम। यहीं से “अगर-मगर” की राजनीति शुरू होती है।

शिंदे को डर किसका — उद्धव या भाजपा?

यही सबसे बड़ा सवाल है। उद्धव ठाकरे का दावा है कि शिंदे भाजपा से डरे हुए हैं। उनका तर्क — “जो एक बार तोड़ सकता है, वह दोबारा भी कर सकता है.”

असल चिंता मेयर पद को लेकर है। BJP चाहती है कि मेयर उसका हो शिंदे गुट पर दबाव है कि शिवसेना की पारंपरिक विरासत न छूटे। मुंबई में दशकों से शिवसेना का मेयर रहा है, और इस पद का जाना बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत को कमजोर कर सकता है।

‘सामना’ का वार: खुली चुनौती

शिवसेना (UBT) के मुखपत्र ‘सामना’ ने सीधे चुनौती दे दी है — “शिवसेना ने मुंबई को 23 मराठी मेयर दिए हैं, क्या यह परंपरा अब टूटेगी?”

संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे के बीच खुली खींचतान का दावा भी किया गया है।

उद्धव बनाम फडणवीस: ‘देवा’ वाला तंज

उद्धव ठाकरे ने कहा — “ईश्वर की इच्छा हुई तो मुंबई में हमारा मेयर होगा.” इस पर फडणवीस ने तंज कसते हुए पूछा — “देवा मतलब भगवान या देवेंद्र?” और जोड़ दिया — “ऊपर वाले ने तय कर दिया है, मेयर महायुति का ही होगा.”

रिजॉर्ट पॉलिटिक्स सिर्फ विपक्ष से बचाव नहीं, बल्कि अपने ही सहयोगियों को साधे रखने की रणनीति भी हो सकती है। बीएमसी की असली लड़ाई अब मेयर चुनाव में दिखेगी — जहां दोस्ती, डर और दांव-पेंच सब साथ चलेंगे।

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