Operation Sindoor Impact: Lashkar ने कबूला असर

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

भारत के Operation Sindoor की कामयाबी अब आधिकारिक तौर पर दुश्मन खेमे से भी कबूल ली गई है।
पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने पहली बार सार्वजनिक मंच से स्वीकार किया है कि भारतीय हमले में मुरिदके स्थित संगठन का मुख्यालय पूरी तरह तबाह हो गया।

यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान अब तक यही दावा करता रहा कि भारतीय कार्रवाई में “सिर्फ आम नागरिक” प्रभावित हुए।

Muridke Strike: Denial vs Reality

6–7 मई की रात भारतीय सेना ने लश्कर के गढ़ मरकज-ए-तैयबा (Muridke) को सटीक निशाना बनाया था।
पाकिस्तान सरकार और सेना ने इस ऑपरेशन को नकारते हुए इसे “झूठा प्रचार” बताया, लेकिन अब लश्कर के अपने कमांडर ने सच्चाई उजागर कर दी है।

Commander Rauf का कबूलनामा

भावी लश्कर कमांडरों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में रऊफ ने कहा:

“जहां इमारतें थीं, वहां अब सिर्फ मलबा बचा है। मस्जिद तक बैठने लायक नहीं रही।”

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरा परिसर जमींदोज हो गया। विडंबना यह रही कि रऊफ ने इसे “अल्लाह की रहमत” बताते हुए कहा कि उनकी जान बच गई — लेकिन संगठन की रीढ़ टूट गई।

Terror Factory Muridke

मुरिदके स्थित Markaz-ud-Dawa-wal-Irshad दशकों से आतंकवाद की नर्सरी रहा है। इसी केंद्र की स्थापना हाफिज सईद ने की थी, जहां से आतंकियों को ट्रेनिंग देकर PoK के लॉन्च पैड्स के जरिए भारत भेजा जाता रहा। हाफिज अब्दुल रऊफ लंबे समय तक इस नेटवर्क का ऑपरेशनल कमांडर रहा है।

जनाज़े और वर्दी का सच

Operation Sindoor में मारे गए आतंकियों की जनाज़ा नमाज़ खुद रऊफ ने पढ़ाई थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस नमाज़ में पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिसने एक बार फिर आतंक और स्टेट मशीनरी के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए।

 झूठ की इमारत ढही

पाकिस्तान कहता रहा — “Civilian casualties”
लश्कर अब कह रहा है — “Everything flattened”

यानी ऑपरेशन सिंदूर ने सिर्फ इमारतें नहीं गिराईं, पाकिस्तान के नैरेटिव की नींव भी उड़ा दी।

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