
बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति इस बार सिर्फ त्योहार नहीं रही, बल्कि लालू परिवार के भीतर जमी बर्फ पिघलाने वाला मौका बन गई। महीनों से चल रही खटास और कथित ‘cold war’ की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए।
तेज प्रताप के घर पहुंचे लालू, साथ दिखे राज्यपाल
इस मौके पर नजारा और दिलचस्प तब हो गया जब बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी कार्यक्रम में नजर आए। सियासी गलियारों में जिस मुलाकात को संकेतों की भाषा में पढ़ा जा रहा था, उसे दही-चूड़ा ने सीधे दिल तक पहुंचा दिया।
“परिवार में कोई नाराजगी नहीं” – लालू यादव
मीडिया से बातचीत में लालू यादव ने साफ शब्दों में कहा, “तेज प्रताप के साथ हमारा पूरा आशीर्वाद है। भोज सबको करना चाहिए और सबको बुलाना चाहिए। परिवार में कोई नाराजगी नहीं है।”
यानी जो बातें महीनों से whisper mode में चल रही थीं, उन पर लालू ने full stop लगा दिया।
पहले पैर छुए, फिर न्योता दिया
तेज प्रताप यादव ने इस सुलह की स्क्रिप्ट बड़े सलीके से लिखी। वे खुद 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आवास पहुंचे, माता-पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर छोटे भाई तेजस्वी यादव को दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया।

सोशल मीडिया पर फैमिली फ्रेम
तेज प्रताप ने इस पूरे पल को X पर शेयर करते हुए लिखा कि उन्होंने पिता लालू यादव, माता राबड़ी देवी से आशीर्वाद लिया और तेजस्वी यादव से मुलाकात की। पोस्ट की सबसे soft तस्वीर रही, जिसमें वे अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में खिलाते नजर आए।
राजनीति की कड़क खबरों के बीच यह तस्वीर सोशल मीडिया पर emotional pause जैसी लगी।
सियासत में संदेश साफ
इस भोज के बहाने लालू परिवार ने यह संकेत दे दिया कि घर का मामला घर में ही सुलझेगा, कैमरे के सामने नहीं लड़ेगा। दही-चूड़ा भले सादा हो, लेकिन इसका सियासी स्वाद काफी गहरा रहा।
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