Indore: लापरवाही से डेढ़ माह के बच्चे का अंगूठा कटा, सर्जरी से जोड़ा गया

सत्येन्द्र सिंह ठाकुर
सत्येन्द्र सिंह ठाकुर

चूहों की समस्या को लेकर पहले से ही सुर्खियों में रहे इंदौर के महाराजा यशवंत राव (MY) हॉस्पिटल में अब एक और गंभीर मामला सामने आया है। इस बार सवाल सफाई का नहीं, बल्कि सीधे medical negligence का है।

डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे के साथ इलाज के दौरान ऐसी लापरवाही हुई, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, डेढ़ माह का बच्चा निमोनिया से पीड़ित था और MY हॉस्पिटल के Chest Ward में वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती था। 7 जनवरी को, डिस्चार्ज से कुछ दिन पहले, नर्स बच्चे के हाथ से IV cannula निकाल रही थी।

इसी प्रक्रिया के दौरान लापरवाही से बच्चे का अंगूठा गंभीर रूप से घायल हो गया।

तुरंत सुपर स्पेशियलिटी रेफर, सर्जरी से बची उंगली

घटना सामने आते ही हॉस्पिटल प्रशासन ने बच्चे को Super Specialty Hospital रेफर किया। MY मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घंगोरिया के मुताबिक तुरंत ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के ज़रिए अंगूठे को जोड़ा गया। बच्चा अब रिकवरी में है और हालत स्थिर बताई जा रही है।

यह राहत की बात है कि समय पर मेडिकल इंटरवेंशन से स्थायी नुकसान टल गया।

नर्स सस्पेंड, सीनियर स्टाफ पर भी कार्रवाई

लापरवाही सामने आने के बाद आरोपी नर्स आरती क्षत्रिय को सस्पेंड किया गया। नर्सिंग इंचार्ज और दो असिस्टेंट नर्सिंग इंचार्ज का एक महीने का वेतन रोका गया। स्पष्ट संदेश दिया गया है कि जिम्मेदारी सिर्फ़ frontline staff की नहीं, supervision की भी है।

जांच के लिए कमेटी गठित

मामले की विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें शामिल हैं:

  1. डॉ. अशोक यादव (Hospital Superintendent)
  2. डॉ. निर्भय मेहता (बाल रोग विशेषज्ञ)
  3. डॉ. रोहित बडेरिया (उप अधीक्षक)
  4. दयावती दयाल (नर्सिंग अधीक्षक)

कमेटी ने आरोपी नर्स का बयान दर्ज कर लिया है और रिपोर्ट का इंतजार है।

डिप्टी CM ने लिया संज्ञान

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल और सपोर्ट स्टाफ की भूमिका की गहन जांच। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह मामला अब सिर्फ़ अस्पताल तक सीमित नहीं रहा, सरकारी निगरानी में है।

इलाज की जगह जोखिम क्यों?

जहां अस्पताल को healing space होना चाहिए, वहीं ऐसी घटनाएं उसे risk zone बना देती हैं। एक शिशु के इलाज में “Oops moment” की कोई जगह नहीं होती।

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