
बांग्लादेश की interim government ने ऐसा फैसला सुना दिया है, जिसने पूरे South Asia की राजनीति में हलचल मचा दी है। Sheikh Hasina की Awami League को साफ़ शब्दों में बता दिया गया है कि फरवरी 2026 के संसदीय चुनावों में पार्टी हिस्सा नहीं ले पाएगी।
कारण भी equally blunt है — पार्टी पर पूर्ण प्रतिबंध। Election Commission ने registration रद्द और Anti-Terrorism Ordinance के तहत ban जारी।
Interim Government का Clear Stand
Chief Advisor के प्रेस सेक्रेटरी Shafiqul Alam ने advisory council की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:
“Awami League की कोई political activity allow नहीं होगी।”
अमेरिकी सांसदों के कथित खत (letters) पर उन्होंने लगभग सटायरिक अंदाज़ में कहा — “हमें उसके बारे में जानकारी नहीं, लेकिन सरकार का स्टैंड crystal clear है।”
यानि विदेश से pressure हो या न हो, policy lock हो चुकी है।
Ban क्यों लगा? Legal Story
मई 2025 में गृह मंत्रालय ने gazette notification जारी कर Awami League और उसके सभी affiliated organizations पर Anti-Terrorism Ordinance के तहत बैन लगा दिया।
यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा, जब तक International Crimes Tribunal (ICT) में चल रहे ट्रायल पूरे नहीं हो जाते। फिलहाल, Awami League के कई वरिष्ठ नेता ट्रिब्यूनल में मुकदमों का सामना कर रहे हैं।
Sheikh Hasina का Counter Attack
विदेश से Sheikh Hasina ने तीखा बयान दिया- “बिना Awami League के चुनाव, चुनाव नहीं — ये सिर्फ ताजपोशी होगी।”
उन्होंने याद दिलाया कि उनकी पार्टी 9 बार जनता के वोट से सत्ता में आई और अब करोड़ों लोगों से उनका voting right छीना जा रहा है।

Student Movement से सत्ता परिवर्तन तक
जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन ने हसीना सरकार को गिरा दिया। अब, ठीक एक साल बाद, interim setup में चुनाव कराए जा रहे हैं — लेकिन सबसे बड़ी लोकप्रिय पार्टी बाहर।
इतिहास भी चेतावनी देता है: “जब बांग्लादेशी अपनी पसंदीदा पार्टी को वोट नहीं दे पाते, तो वे बूथ तक जाते ही नहीं।”
Low turnout = Low legitimacy
BNP और Jamaat का Advantage?
Awami League के बाहर होने से BNP, Jamaat-e-Islami को खुला मैदान मिल गया है। लेकिन सवाल यह है — क्या चुनाव competitive होगा? या सिर्फ managed democracy?
Democracy at Crossroads
Muhammad Yunus की interim government पर आरोप लग रहे हैं कि बिना एक वोट के शासन और अब popular party पर ban यह national reconciliation के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है।
Sheikh Hasina की चेतावनी साफ है — नई सरकार को moral legitimacy की भारी कमी झेलनी पड़ सकती है।
Bangladesh Election 2026 अब सिर्फ चुनाव नहीं रहा — ये लोकतंत्र की परीक्षा बन चुका है। अगर चुनाव से पहले ही सबसे बड़ी पार्टी बाहर है, तो ballot box में सिर्फ वोट नहीं, बल्कि भविष्य की विश्वसनीयता भी डाली जा रही है।
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