गाज़ा में सेना भेजने को तैयार पाकिस्तान, पर हमास पर हाथ नहीं लगाएगा

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वह गाज़ा में अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन के तहत अपनी सेना भेजने को तैयार है, लेकिन हमास को निरस्त्र करने में कोई भूमिका नहीं निभाएगा। इसकी पुष्टि पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में की।

उन्होंने कहा— “हम वहां पीसकीपिंग के लिए जा रहे हैं, न कि किसी को हथियार डालने पर मजबूर करने।”

यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी मध्यस्थता वाले Gaza Peace Deal पर तेजी से चर्चाएं चल रही हैं और एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (ISF) बनाने की बात हो रही है।

UN Mandate के बिना नहीं जाएगी पाक सेना

इशाक डार ने साफ कहा कि पाकिस्तान सिर्फ UN Security Council के स्पष्ट जनादेश पर ही सेना भेजेगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने यह निर्णय फील्ड मार्शल से परामर्श के बाद लिया है।

पाकिस्तान के अनुसार, उनका रोल Peacekeeping का होगा। Peace Enforcement यानी जबरन शांति लागू करना उनका काम नहीं। हमास को निशाना बनाने का काम फिलिस्तीनी एजेंसियों का दायित्व है।

ISF में शामिल होने को इंडोनेशिया ने पहले ही दिए 20,000 सैनिक

रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडोनेशिया ISF के लिए 20,000 सैनिक भेजने की पेशकश कर चुका है। इसी बीच पाकिस्तान में यह अटकलें थीं कि उसे हमास को निरस्त्र करने का टास्क दिया जा सकता है, जिस पर देश में राजनीतिक हलचल बढ़ गई थी।

डार ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा— “हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जो हमें फिलिस्तीनी प्रतिरोध के खिलाफ खड़ा कर दे।”

UNSC ने Gaza Conflict रोकने के लिए ISF को मंजूरी दी

पिछले हफ्ते UN Security Council ने अमेरिकी प्रस्ताव के समर्थन में वोट करते हुए ISF को मंजूरी दी। 13 देशों ने समर्थन में वोट किया—जबकि रूस और चीन अनुपस्थित रहे।

प्रस्ताव के अनुसार ISF को दिए गए अधिकार, हथियारों और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करने का समर्थन। Gaza का आंशिक डिमिलिटराइजेशन। क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करना। लेकिन हमास ने इस प्रस्ताव को सीधे खारिज कर दिया।

इस्लामाबाद दो टूक: हमास को आतंकवादी नहीं मानते, फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं

पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज उठाता रहा है और हमास को आतंकी संगठन मानने से इनकार करता है। नए बयान से यह साफ है कि पाकिस्तान ऐसे किसी कदम से बचना चाहता है जो उसे फिलिस्तीनी प्रतिरोध के खिलाफ खड़ा कर दे।

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