
मित्रों, ज्ञान एक मुफ्त चीज़ है— बस दिमाग का थोड़ा सा स्पेस चाहिए। इसी स्पेस की कमी के कारण लोग धर्मपरायण (भावना) और धर्मांधता (अंधभावना) को एक ही समझ लेते हैं। और फिर बोलते हैं— “किसी ने बताया ही नहीं।” तो आज सुन लीजिए, समझ लीजिए… और सेव करके रखिए।
1. धर्मपरायणता क्या है? – Faith with Logic
धर्मपरायण होना मतलब— ईश्वर में विश्वास रखना, सदाचार, करुणा, संयम, सेवा जैसे मूल्यों का पालन करना। तर्क और अध्यात्म दोनों को साथ लेकर चलना।
ये वही लोग होते हैं जो पूजा भी करते हैं और प्लास्टिक बैन भी। ये लोग कहते हैं— “धर्म दिल को बड़ा करता है, दिमाग को बंद नहीं।”
2. धर्मांधता क्या है? – Fanaticism with Full Confidence, Zero Logic
धर्मांधता का मतलब— बिना सोचे-समझे मान लेना, हर सवाल को पाप मान लेना, परंपरा को विज्ञान से ऊपर रख देना, और सोशल मीडिया की फॉरवर्ड यूनिवर्सिटी से “ज्ञान” लेना।
ये लोग कहते हैं—“मेरी बात मानो, नहीं तो तुम अधर्मी!”
यहां आस्था भी ICU में चली जाती है और लॉजिक तो जन्म से ही मिसिंग होता है।
3. दोनों में फर्क? – Simple! एक बने इंसान, दूसरा बनाए उग्र इंसान
| धर्मपरायणता | धर्मांधता |
|---|---|
| मन शांत | मन उग्र |
| प्रेम | द्वेष |
| तर्क | तर्क-विरुद्ध |
| मानवजाति पहले | जाति-धर्म पहले |
| धर्म से उन्नति | धर्म के नाम पर तनाव |
यानी एक धर्म जोड़ता है, और दूसरा धर्म के नाम पर तोड़ता है।
Worship vs. WhatsApp University
धर्मपरायण लोग कहते हैं— “भक्ति अंदर से आती है।”

धर्मांध लोग कहते हैं— “भक्ति मेरे रील्स से आती है।”
धर्मपरायणता बोलती है—“सत्य खोजो।”
धर्मांधता बोलती है—“सिर्फ मेरा सत्य ही सत्य है!”
5.धर्म को समझो, धर्मांधता को दूर रखो
धर्म हमेशा शांति, नैतिकता और सद्भाव की बात करता है। धर्मांधता— सिर्फ शोर और शोऑफ की।
इसलिए मित्रों, धर्म से जुड़िए— लेकिन ब्लाइंड मोड ON करके नहीं। नहीं तो फिर कह मत देना कि बताया नहीं!
श्रीनगर में दिल्ली-जैसा धमाका: PAFF ने जिम्मेदारी ली
