
सीबीएसई (CBSE) की 10वीं बोर्ड परीक्षा की डेटशीट आते ही तमिल भाषा चुनने वाले छात्रों के अभिभावक भड़क उठे हैं। तमिल और साइंस पेपर के बीच सिर्फ एक दिन का गैप देख लग रहा है — “क्या ये बोर्ड एग्ज़ाम है या स्पीड टेस्ट?”
साइंस में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी तीनों विषयों का दिमागी झूला झूलने के बाद, बच्चों को बस एक दिन आराम देना शायद CBSE को ज़रूरी नहीं लगा।
“Science सिर्फ Subject नहीं, तीन Part का मैराथन है”
“हिंदी और संस्कृत वालों को तीन दिन की छुट्टी मिल रही है, लेकिन तमिल वालों को सिर्फ एक दिन! साइंस कोई ‘सोशल साइंस’ नहीं है — इसमें दिमाग जलता है, पेन नहीं।” “CBSE अब Competency-Based Assessment की बात करता है, लेकिन टाइमटेबल में Competency कहां है?”
CBSE डेटशीट के मुताबिक
परीक्षा शुरू: 17 फरवरी 2026
इंग्लिश: 21 फरवरी
तमिल: 23 फरवरी
साइंस: 25 फरवरी
संस्कृत: 28 फरवरी

हिंदी: 2 मार्च
यानी तमिल के बाद सीधे साइंस की रेस — “दो दिन में तीन चैप्टर नहीं, तीन सब्जेक्ट रिवाइज करो!”
“10वीं के नंबर ही बनाते हैं 11वीं की स्ट्रीम”
ये ‘वन डे गैप पॉलिसी’ बच्चों के भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती है। “CBSE को समझना चाहिए कि ये बच्चे कोई मशीन नहीं हैं। 10वीं के नंबर ही तय करते हैं कि आगे साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स में जाना है।”
तमिल छात्रों के लिए चिंता, CBSE के लिए चुनौती
अब ये मुद्दा सिर्फ एक दिन के गैप का नहीं, बल्कि समानता के अधिकार जैसा महसूस हो रहा है। CBSE इस टाइमटेबल पर पुनर्विचार करे और तमिल छात्रों को भी उतना ही समय मिले जितना दूसरों को। “हम CBSE से बस इतना चाहते हैं कि टाइमटेबल बनाते वक्त थोड़ी ‘क्लास’ ले ले।”
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