
“बहुत सी ट्यूबलाइट का ऐसा ही होता है…”
– पीएम मोदी, संसद में राहुल गांधी पर तंज
राजनीति में शब्दों के तीर तो बहुत चलाए जाते हैं, लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हैं, तो शब्द भाले की तरह चुभते भी हैं और हंसा-हंसा कर लोटपोट भी कर देते हैं।
शोले स्टाइल सटायर: ‘अरे ओ सांभा, कितने वोट लाए?’
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी अक्सर शोले के डायलॉग से कांग्रेस पर तंज कसते थे।
“अरे ओ सांभा, कितने वोट लाए?” — ये सवाल महज़ चुटकुला नहीं था, ये था एक सीधा राजनीतिक कटाक्ष, जो जनता को गुदगुदाकर सोचने पर मजबूर कर देता था।
गालीप्रूफ से डंडाप्रूफ बनने का संकल्प
फरवरी 2020 का संसद सत्र कोई भूल नहीं सकता। जब विपक्षी नेता ने धमकी दी कि “छह महीने में मोदी को डंडे से मारेंगे” — तब पीएम मोदी का जवाब था मास्टरक्लास!
“इन 6 महीनों में मैं इतना सूर्य नमस्कार करूंगा कि पीठ डंडे झेलने लायक बन जाएगी।”
ये पंक्ति एक राजनीतिक ब्लो बैक नहीं, बल्कि फिटनेस मंत्र, हास्य बाण और हाजिरजवाबी का फुल डोज थी।
जब ट्यूबलाइट वाला पंच लगा करंट
राहुल गांधी की बीच में टोका-टोकी पर पीएम मोदी ने कहा:
“मैं 30-40 मिनट से बोल रहा था लेकिन करंट पहुंचते-पहुंचते इतनी देर लगी… बहुत सी ट्यूबलाइट का ऐसा ही होता है।”
ये लाइन ऐसी थी कि सदन में बैठा विपक्ष भी हंसी रोक नहीं पाया। ये वो मॉमेंट था जब संसद वाक्युद्ध की जगह कॉमेडी क्लब बन गया।
व्यंग्य की बुनाई में लिपटी रणनीति
मोदी के सटायर महज मनोरंजन नहीं हैं। ये होते हैं – पॉलिटिकल मैसेजिंग टूल, जनता से कनेक्शन का जरिया और विरोधियों को बैकफुट पर धकेलने का सबसे हल्का लेकिन धारदार हथियार।
सियासत में हास्य का सुपरस्टार
प्रधानमंत्री मोदी का ह्यूमर एकदम देसी है — मुहावरों से भरा, लोकल टच लिए हुए और स्टेज पर रॉकस्टार एटीट्यूड के साथ पेश किया गया।
यही वजह है कि उनकी रैलियां सिर्फ राजनीतिक इवेंट नहीं, बल्कि “मिनी-हास्य सम्मेलन” बन जाती हैं।
राजनीति में रंजिश जरूरी है, पर अगर तंज में हंसी हो, तो सियासत भी हसीन लगती है।
पीएम मोदी ने ये साबित कर दिया है कि राजनीति सिर्फ गुस्से और आरोप-प्रत्यारोप का खेल नहीं, ये मंच हो सकता है ह्यूमर और होशियारी का भी, बशर्ते वक्ता में चुटकी लेने की कला हो।
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