
पटना का पाटलिपुत्र खेल परिसर, 13 और 14 सितंबर 2025 को देश के सबसे रोमांचक आर्चरी मुकाबलों का गवाह बना। पहली बार बिहार में आयोजित ‘खेलो इंडिया एनटीपीसी जोनल आर्चरी टूर्नामेंट 2025’ ने साबित कर दिया कि बिहार अब खेलों में पीछे नहीं, निशाने पर है।
कौन बने विजेता: स्वर्ण से कांस्य तक का सफर
इस टूर्नामेंट में कंपाउंड तीरंदाजी स्पर्धा में प्रतिभागियों ने अपना सर्वोच्च प्रदर्शन दिया।

पुरुष वर्ग में:
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शुभम दास (RSPB) – स्वर्ण पदक
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दिव्यांशु सिंह (झारखंड) – रजत
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विक्रम कुमार (बिहार) – कांस्य
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एमडी आदिल (SPSB) – चौथा स्थान

महिला वर्ग में:
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प्राप्ति वेटेबल (पश्चिम बंगाल) – स्वर्ण पदक
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संगीता कुमारी मुर्मू (झारखंड) – रजत
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राज अदिति कुमारी (झारखंड) – कांस्य
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सलोनी उरांव (झारखंड) – चौथा स्थान
बिहार के लिए विक्रम कुमार का कांस्य पदक एक नया मुकाम है, जिससे राज्य की आर्चरी को नई ऊर्जा मिली है।
मेडल के साथ मिला नकद पुरस्कार
विजेताओं को सिर्फ ताली नहीं, तगड़ा इनाम भी मिला:
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प्रथम स्थान: ₹20,000
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द्वितीय स्थान: ₹15,000
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तृतीय स्थान: ₹10,000
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चौथा स्थान: ₹5,000

“जब तीर सटीक हो, तो निशाना इनाम से खाली नहीं जाता!”
350+ खिलाड़ी, 6 राज्य, और कई संगठनों की भागीदारी
प्रतियोगिता में कुल 350 प्रतिभागी, प्रशिक्षक, प्रबंधक व तकनीकी पदाधिकारी शामिल हुए। इसमें:
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200 पुरुष और 120 महिला खिलाड़ी
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राज्यों में: बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल
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संगठन: RSPB, SPSB, CSEB
बिहार ने 72 खिलाड़ियों (36 पुरुष, 36 महिला) को मैदान में उतारा।

सम्मान और प्रेरणा: आयोजन में शामिल हुए दिग्गज
समापन समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित करने पहुंचे कई गणमान्य अतिथि:
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रविंद्र नाथ चौधरी, निदेशक, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण
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मनोज कुमार, सचिव, बिहार तीरंदाजी संघ
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हरेश कुमार, प्रतियोगिता निदेशक (भारतीय तीरंदाजी संघ)
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नूतन कुमारी, उपाध्यक्ष, बिहार ओलंपिक संघ
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अंजलि कुमारी, अतिथि
खेल ही नहीं, संस्कार भी
इस आयोजन ने सिर्फ मेडल नहीं बांटे, संस्कार और सम्मान की भी झलक दिखाई। महिला खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी और दर्शकों की सराहना इस आयोजन की असली जीत रही।
“जब मैदान में बाण चलता है, तो केवल निशाना नहीं – भविष्य तय होता है।”
‘खेलो इंडिया’ सिर्फ एक स्कीम नहीं, युवाओं के लिए ड्रीम है। बिहार में ऐसे आयोजन न केवल प्रतिभाओं को मंच दे रहे हैं, बल्कि राज्य की खेल संस्कृति को पुनर्जीवित कर रहे हैं।
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