
सीनाई पर्वत, जिसे लोकल भाषा में जबल मूसा कहा जाता है, वो जगह है जहां ईश्वर ने पैग़ंबर से सीधे बात की थी — जलती झाड़ी के बीच! लेकिन आज, उस पवित्र धरती पर केबल कार और विला बिछाए जा रहे हैं।
सरकार कहती है – “ये विकास है।”
बद्दू लोग कहते हैं – “हमें तो किसी ने पूछा ही नहीं!”
“विकास” की बुलडोज़री चाल और यूनेस्को की सांसें अटकी
यहाँ एक World Heritage Site है — मॉनेस्ट्री, रेगिस्तान, पहाड़ और सदियों पुराना शांति का संदेश। पर अब वहां होटल, पार्किंग, एयरपोर्ट और एक केबल कार की लाइन लगी है।
यूनेस्को कहता है – “जरा धीरे चलो भाई!”
मिस्र सरकार कहती है – “2028 तक 3 करोड़ टूरिस्ट चाहिए। चलो Bulldozer!”
बद्दू समुदाय: जिनका घर, जिनकी ज़मीन… लेकिन Development में नो एंट्री
जेबेलया क़बीला – जो सदियों से सीनाई का हिस्सा हैं – अब खुद बेघर होते जा रहे हैं। इनके टूरिस्ट कैंप और घर तोड़े जा चुके हैं, मुआवज़ा? “धैर्य रखो बच्चा, विकास हो रहा है।”
यहाँ तक कि कब्रिस्तान भी नहीं बचा — पार्किंग बनानी थी ना!
धार्मिक आस्था बनाम Real Estate
सीनाई की मॉनेस्ट्री – जहां बाइबिल की सबसे पुरानी कॉपी मिलती है – आज बाइज़न्टाइन, फातिमी, मुस्लिम और ईसाई शांति का प्रतीक है।
लेकिन अब इस शांति की ज़मीन पर हो रही है लीगल लड़ाई।
ग्रीस के चर्च ने तो गुस्से में कहा – “धरोहर नहीं बची तो हमसे मत कहना।”
मॉनेस्ट्री के आर्कबिशप ने दुख में पद ही छोड़ दिया।
“स्पिरिचुअल गिफ्ट” या “स्मार्ट सिटी”?
मिस्र सरकार का कहना है कि ये “पूरी दुनिया को एक तोहफ़ा है।”
पर स्थानीय लोग कह रहे हैं – “किसी ने कार्ड भी नहीं दिया!”
केबल कार से अब मूसा की चढ़ाई ‘ऑटोमैटिक’ हो जाएगी।
क्या भविष्य में बोर्ड लगेगा?

“Press Button for Divine Revelation!”
यूनेस्को की आँखें नम, किंग चार्ल्स की चिंता ग़मगीन
यूनेस्को बार-बार चेतावनी दे चुका है — “पहले असर देखो, फिर कंस्ट्रक्शन करो।” लेकिन जवाब में नई सड़कें, नई मशीनें और नई लाइट्स ही आती हैं। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स, जो सेंट कैथरीन फ़ाउंडेशन के संरक्षक हैं, उन्होंने इसे “आध्यात्मिक ख़ज़ाना” कहा — पर शायद खज़ाने की खुदाई भी चालू हो चुकी है।
रेगिस्तान का वो सन्नाटा अब हॉर्न से भरा जाएगा?
रेगिस्तान, जो कभी शांति, ध्यान और साधुओं का घर था, अब बनने जा रहा है टूरिस्ट स्पॉट – सेल्फी पॉइंट, कैफे स्पेशल!
बेन हॉफलर कहते हैं —
“विकास ऐसा नहीं होना चाहिए जो लोगों पर थोपा जाए, बल्कि ऐसा जो उनके साथ मिलकर हो।”
सीनाई – जहां कभी देवता उतरे थे, अब वहां प्रॉपर्टी डीलर उतर रहे हैं। धरोहर से मुनाफ़ा निकालने की कोशिश इतिहास को मज़ाक बना सकती है।
और शायद अगली बार, जब मूसा उतरें — तो उन्हें रास्ता दिखाने के लिए बद्दू नहीं मिलेगा।
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