
हरितालिका तीज एक ऐसा खास व्रत है जिसे मुख्य रूप से सुहागिन और अविवाहित महिलाएँ करती हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन की कहानी से जुड़ा है और उत्तर भारत के साथ-साथ महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी बड़े श्रद्धा से मनाया जाता है।
हरितालिका का शाब्दिक अर्थ और पौराणिक कथा
‘हरितालिका’ शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है – ‘हरि’ मतलब ‘हरना’ या ‘अपहरण करना’ और ‘तालिका’ मतलब ‘सखी’। कथा के अनुसार, जब माता पार्वती के पिता ने उनकी शादी किसी और से तय कर दी, तो उनकी सहेलियों ने उन्हें अपहरण कर हिमालय के जंगल में छिपा दिया ताकि वे भगवान शिव की कठोर तपस्या कर सकें।
भगवान शिव का प्रकट होना
माता पार्वती की कठोर तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें अपना जीवनसाथी स्वीकार किया। इसी पावन घटना की याद में हरितालिका तीज मनाई जाती है।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
हरितालिका तीज केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि नारी शक्ति और दृढ़ निश्चय का प्रतीक भी है। यह व्रत महिलाओं के आत्मबल, एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है। अविवाहित महिलाएं अपने लिए अच्छा जीवनसाथी पाने की कामना करती हैं, जबकि सुहागिनें पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए इस व्रत को करती हैं।
हरितालिका तीज की पूजा विधि
इस दिन महिलाएँ निर्जल उपवास रखती हैं, यानी न भोजन करती हैं न जल ग्रहण। मिट्टी की शिव-पार्वती की मूर्तियाँ स्थापित कर भजन-कीर्तन करती हैं और कथा सुनती हैं। रात्रि जागरण व पूजा के बाद अगले दिन सिंदूर अर्पित कर व्रत का पारण किया जाता है।
भारत में हरितालिका तीज का क्षेत्रीय स्वरूप
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उत्तर भारत: भजन-कीर्तन और कथा का आयोजन।
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बिहार और झारखंड: सामूहिक कथा और झूले का महत्व।

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राजस्थान, मध्य प्रदेश: तीज पर्व के रूप में उत्सव।
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महाराष्ट्र: मिट्टी की मूर्तियाँ बनाकर पूजा।
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दक्षिण भारत: गौरी हब्बा के नाम से पूजा।
2025 में हरितालिका तीज का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष हरितालिका तीज 26 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। शुभ पूजा समय सुबह 5:56 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा।
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