
संसद के मॉनसून सत्र में एक बार फिर सियासी पारा हाई! विपक्षी सांसदों ने जिस जोश से नारेबाजी की, उतने ही जोश से अगर सवाल पूछते, तो शायद देश को भी कुछ जवाब मिल जाता। पर नहीं, यहां तो “तोड़फोड़ की प्रतियोगिता” चल रही थी।
“सरकारी संपत्ति कोई बाप की नहीं!” – ओम बिरला का गुस्सा 2.0
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जब देखा कि माइक, डेस्क और डेकोर की हालत जंतर-मंतर जैसी हो रही है, तो उन्होंने माइक ON कर दिया (शुक्र है, यह माइक बचा था!) और बोले:
“जिस ताकत से आप नारे लगा रहे हैं, उसी ताकत से सवाल भी पूछिए। जनता ने आपको सरकारी संपत्ति तोड़ने के लिए नहीं भेजा!”
Translation: “Mic से लड़ो, Mic से मत लड़ो!”
चेतावनी नहीं, वार्निंग थी – निर्णायक कार्रवाई का अल्टीमेटम
बिरला जी ने यह भी साफ कर दिया कि अगर यह ‘तोड़क दस्ते’ की हरकतें जारी रहीं, तो उन्हें “निर्णायक निर्णय” लेना पड़ेगा। मतलब, अगली बार तो शायद सीट नंबर के साथ जुर्माना भी आए!
संसद या ‘रिएलिटी शो’? विपक्षी सांसदों का संसद परिसर में प्रदर्शन
दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है। बाहर प्रदर्शन, अंदर हंगामा, और बीच में जनता सोच रही है – “Netflix छोड़ कर संसद क्यों देखें?”
दूसरी ओर राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’
जब संसद में शोर हो रहा था, तब राहुल गांधी बिहार की गलियों में “लोकतंत्र की ज्योति” लेकर चल रहे थे। औरंगाबाद से यात्रा शुरू की, साथ में तेजस्वी यादव भी, लेकिन संसद में उनके सहयोगी नेताओं ने जो रैली निकाली, वो हंगामा एक्सप्रेस थी।
संसद में अगला प्रस्ताव – “हंगामा करने के लिए सीटें बुक करें”
अब वक्त आ गया है कि संसद में सीट अलॉटमेंट के साथ ‘हंगामा स्लॉट’ भी तय किए जाएं –

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11:00 AM – माइक पर झपट्टा
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12:00 PM – वाकआउट या वॉक-इन ड्रामा
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1:00 PM – लंच विद मीडिया बाइट
देश देख रहा है… और झेल भी रहा है!
संसद वो जगह है जहां नीति बनती है, तोड़फोड़ नहीं! लेकिन आजकल लगता है जैसे हर सेशन एक नई रिएलिटी सीरीज है – “संसद के स्टार्स – Mic vs Might”!
अब देखना ये है कि ओम बिरला के ‘निर्णायक निर्णय’ क्या होंगे। जनता तो popcorn लेकर बैठ ही गई है…
“बहुमत है, समर्थन चाहिए! NDA को निर्विरोध उपराष्ट्रपति का क्रश लग गया है
