मिडिल ईस्ट की जंग ने सिर्फ मिसाइलों को नहीं, कई देशों की अर्थव्यवस्था को भी हिला दिया है। सबसे ज्यादा झटका उस मुल्क को लगा है जो पहले से ही आर्थिक ICU में पड़ा था। अब हालात ऐसे हैं कि Pakistan ने फिर वही पुराना दरवाजा खटखटाया है। फर्क बस इतना है कि इस बार दस्तक में एक अजीब सी बेबसी है, जैसे कोई गुनगुना रहा हो: “भर दे झोली मेरी या हबीबी…” खाली खजाना और रियाद की ओर नजर भारी आर्थिक दबाव और विदेशी मुद्रा संकट के बीच पाकिस्तान…
Read MoreDay: March 10, 2026
परमाणु कार्यक्रम, लोकतंत्र बहाली तो बहाना है असल मकसद ईरान पर कब्ज़ा है
मिडिल ईस्ट में गूंजते बमों की आवाज सिर्फ मिसाइलों की नहीं, बल्कि भू-राजनीति के पुराने खेल की भी लगती है। आधिकारिक बयान कहता है कि लक्ष्य परमाणु कार्यक्रम है, लोकतंत्र बहाली है लेकिन सवाल यह है कि अगर मकसद सिर्फ परमाणु ठिकाने होते तो रिहाइशी इलाकों तक धमाके क्यों पहुंचते? युद्ध के इस धुएं के पीछे एक और कहानी अक्सर फुसफुसाती है। उस कहानी का नाम है ऊर्जा, खनिज और रणनीतिक संसाधन। और इसी वजह से आज दुनिया की नजर Iran की जमीन के नीचे छिपे खजाने पर भी टिकी…
Read Moreपाकिस्तान में पेट्रोल 321 रु., PM से पूछा – ट्रंप से रियायत क्यों नहीं?
मिडिल ईस्ट की जंग का असर अब सीधे पाकिस्तान की सड़कों पर दिख रहा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें हैं, कीमतें आसमान पर हैं और लोगों के धैर्य का टैंक भी लगभग खाली हो चुका है। इसी बीच पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार Najam Sethi ने लाइव टीवी पर ऐसी बात कह दी जिसने वहां की सियासत में हलचल मचा दी। सवाल सीधा था और चुभता हुआ भी अगर भारत को राहत मिल सकती है तो पाकिस्तान क्यों नहीं? पेट्रोल 321 रुपये, जनता लाइन में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव…
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