
पश्चिम उत्तर प्रदेश की सुबह आम दिनों जैसी नहीं थी। आसमान में बादल थे, हवाओं में बेचैनी थी और खेतों में खड़ी फसलें जैसे किसी अनहोनी का इंतजार कर रही थीं।
कुछ ही देर में तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत को झकझोर दिया।
Meerut, Muzaffarnagar, Saharanpur, Baghpat, Shamli, Ghaziabad, Hapur, Bulandshahr और Noida जैसे जिलों में खेतों की तस्वीर अचानक बदल गई।
जहां कल तक गेहूं की बालियां हवा में लहरा रही थीं, आज वही खेत झुकी हुई फसलों और टूटे पौधों की कहानी कह रहे हैं।
गेहूं-सरसों पर सबसे ज्यादा मार- खेतों में बिछ गई फसल
किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष Chaudhary Savit Malik के मुताबिक इस मौसम ने सबसे ज्यादा चोट गेहूं और सरसों पर की है।
उन्होंने बताया गेहूं की बालियां तेज हवा से जमीन पर बिछ गईं। दाने पतले हो गए। ओलों से पत्तियां फट गईं। सरसों की हालत भी कम खराब नहीं रही। फूल और दाने झड़ गए, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा।
सब्जियों और बागवानी पर भी संकट- टमाटर-बैंगन के पौधे टूटे
बारिश और ओलों का असर सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रहा।
कई किसानों ने शिकायत की कि टमाटर के फल फट गए। बैंगन और मिर्च के पौधे गिर गए। आलू की फसल को भी नुकसान हुआ। बागवानी में भी हाल अच्छा नहीं रहा।
अमरूद, नींबू और केले के बागों में फल गिरने और टहनियां टूटने की खबरें सामने आई हैं।
पैदावार पर भारी असर- कटाई से पहले नुकसान
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम का यही रुख रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञ Shekhar Dixit कहते हैं, “इस समय गेहूं और सरसों की फसल कटाई के करीब होती है। ऐसे समय ओलावृष्टि सबसे ज्यादा नुकसान करती है। कई जगह पैदावार में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट संभव है।”
उन्होंने हल्के व्यंग्य में कहा, “किसान पूरे साल मौसम का इंतजार करता है… और मौसम कभी-कभी किसान का इंतजार खत्म कर देता है।”
किसानों की सरकार से मांग- तुरंत सर्वे और मुआवजा
किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- प्रभावित खेतों का संयुक्त सर्वे कराया जाए
- किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ तत्काल मुआवजा दिया जाए
- फसल बीमा कंपनियां तुरंत क्लेम प्रक्रिया शुरू करें
- सब्जी और बागवानी को भी बीमा कवर में शामिल किया जाए
किसान यूनियन ने साफ कहा है कि 72 घंटे के अंदर सर्वे शुरू होना चाहिए।
खेतों में चिंता, आसमान पर नजर- किसान की सबसे बड़ी लड़ाई
खेती हमेशा से मौसम के भरोसे रही है। लेकिन इस बार पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत पर मौसम ने पानी फेर दिया। एक किसान ने कहा, “सरकार MSP देती है, योजनाएं बनाती है… लेकिन जब फसल पर ओले गिरते हैं, तब किसान को सिर्फ आसमान ही दिखाई देता है।”
और यही सच है किसान की सबसे बड़ी लड़ाई कभी बाजार से होती है, तो कभी सीधे बादलों से।
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