‘सर्जिकल स्ट्राइक’? बंगाल चुनाव से पहले EC ने बदल डाले टॉप अफसर

संजीव पॉल
संजीव पॉल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव आते ही तापमान हमेशा बढ़ जाता है, लेकिन इस बार गर्मी मार्च में ही महसूस होने लगी है।

चुनाव से पहले Election Commission of India ने ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरे प्रशासनिक ढांचे को हिला दिया।

आयोग ने एक झटके में राज्य के कई शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को बदल दिया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त रह सके। राजनीतिक गलियारों में इसे “प्रशासनिक रीसेट” कहा जा रहा है।

डीजीपी से कमिश्नर तक बड़ा फेरबदल

चुनाव आयोग ने 1992 बैच के आईपीएस Siddhnath Gupta को पश्चिम बंगाल का नया डीजी और पुलिस प्रमुख (प्रभारी) नियुक्त किया है। इसके साथ ही Ajay Kumar Nand को कोलकाता का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है।

आयोग का साफ संदेश है कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा।

इसके अलावा नटराजन रमेश बाबू को डीजी (सुधारात्मक सेवाएं), अजय मुकुंद रानाडे को एडीजी (कानून व्यवस्था) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इन सभी अधिकारियों को तत्काल कार्यभार संभालने और 16 मार्च तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य सचिव और गृह सचिव भी बदले

यह कार्रवाई सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं रही। चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन के दो सबसे प्रभावशाली पदों पर भी बदलाव कर दिया।

मुख्य सचिव Nandini Chakraborty की जगह अब 1993 बैच के आईएएस Dushyant Nariyala को नया मुख्य सचिव बनाया गया है।

वहीं गृह सचिव Jagdish Prasad Meena की जगह Sanghamitra Ghosh को गृह और पहाड़ी मामलों का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है।

आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि हटाए गए अधिकारी चुनाव खत्म होने तक किसी भी चुनावी काम में शामिल नहीं होंगे।

टीएमसी का तीखा विरोध

इस फैसले के बाद राज्य की सत्ताधारी पार्टी All India Trinamool Congress ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। टीएमसी सांसद Sagarika Ghose ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। उनका कहना है कि जिस तरह आधी रात को प्रशासनिक बदलाव किए गए, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। विरोध में Derek O’Brien के नेतृत्व में टीएमसी सांसदों ने संसद से वॉकआउट भी किया।

पार्टी का आरोप है कि यह कदम राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश है।

आयोग का तर्क: हिंसा-मुक्त चुनाव

चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरा फैसला सिर्फ और सिर्फ निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है। इसलिए आयोग इस बार प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं चाहता।

चुनाव और ट्रांसफर का मौसम

भारत में चुनाव का मौसम आते ही दो चीजें सबसे ज्यादा तेजी से चलती हैं एक राजनीतिक बयान और दूसरा अधिकारियों का ट्रांसफर।

कभी-कभी लगता है कि प्रशासनिक कुर्सियां भी चुनावी सीटों की तरह होती हैं जिस पर कौन बैठेगा, यह भी एक राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं। और बंगाल की राजनीति तो वैसे भी भारतीय लोकतंत्र की सबसे नाटकीय स्क्रिप्ट मानी जाती है।

आगे की असली परीक्षा

अब असली चुनौती इन नए अधिकारियों के सामने है। क्योंकि बंगाल में चुनाव सिर्फ वोटिंग नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे की परीक्षा भी होते हैं। अगर मतदान शांतिपूर्ण रहा तो आयोग का यह कदम “सख्त लेकिन जरूरी” कहलाएगा। और अगर विवाद बढ़े तो…राजनीति में बहस का नया अध्याय खुल जाएगा।

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