तमिलनाडु BJP का 80 सीट ऑफर, लेकिन विजय की नजर सीधे CM कुर्सी पर

संजीव पॉल
संजीव पॉल

तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी हाई-बजट फिल्म की तरह चल रही है। स्क्रिप्ट में सस्पेंस है, किरदार बड़े हैं और दर्शक पूरे राज्य में बैठे हैं।

इस फिल्म के हीरो हैं Vijay। फिल्मी पर्दे पर जनता के दिल जीतने के बाद अब वह राजनीति के मंच पर उतर चुके हैं।
उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam पहले ही तमिलनाडु की राजनीति में तीसरे विकल्प की चर्चा पैदा कर चुकी है।

लेकिन अब मीडिया गलियारों में जो खबर तैर रही है, उसने सियासी पारा और बढ़ा दिया है। दावा है कि Bharatiya Janata Party और विजय की पार्टी के बीच गठबंधन की खिचड़ी लगभग पक चुकी है।

BJP का बड़ा ऑफर: 80 सीट और डिप्टी CM

सूत्रों के हवाले से जो चर्चा चल रही है, वह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा ट्विस्ट बन सकती है। बताया जा रहा है कि बीजेपी ने विजय को गठबंधन में लाने के लिए 80 विधानसभा सीटों का प्रस्ताव रखा है। इतना ही नहीं, ऑफर के साथ एक और आकर्षक पैकेज भी बताया जा रहा है डिप्टी चीफ मिनिस्टर का पद।

अगर यह समीकरण बनता है तो राज्य की मौजूदा सत्ता समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है। राजनीतिक विश्लेषक सुरेंद्र दुबे का कहना है कि
विजय की लोकप्रियता सिर्फ सिनेमा तक सीमित नहीं है। उनकी फैन फॉलोइंग चुनावी वोट में बदल गई तो तमिलनाडु की राजनीति का गणित पलट सकता है।

CM कुर्सी पर अटकी बातचीत

लेकिन सियासत की पटकथा इतनी सीधी भी नहीं होती। रिपोर्ट्स के मुताबिक सबसे बड़ा पेच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर है। खबरें कहती हैं कि विजय डिप्टी CM का पद स्वीकार करने को लेकर सहज नहीं हैं। उनकी नजर सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है।

यही वजह है कि बातचीत में डेडलॉक की स्थिति बन गई है। कहा जा रहा है कि बीजेपी अब एक दूसरे राज्य के ताकतवर डिप्टी CM के जरिए मध्यस्थता करा रही है ताकि इस सियासी गांठ को खोला जा सके।

स्टालिन और विपक्ष की बढ़ी धड़कनें

अगर यह गठबंधन बनता है तो इसका सबसे बड़ा असर मौजूदा सत्ता पर पड़ेगा। तमिलनाडु की राजनीति फिलहाल M. K. Stalin
की अगुवाई वाली सरकार के इर्द-गिर्द घूमती है।

दूसरी तरफ Edappadi K. Palaniswami भी अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में लगे हैं। ऐसे में विजय की एंट्री उस खिलाड़ी की तरह है जो अचानक मैच के बीच मैदान में उतर जाए। और कई बार एक नया खिलाड़ी ही पूरा मैच पलट देता है।

क्या दांव पर लग जाएगी ‘तीसरे विकल्प’ वाली छवि

गठबंधन की खबरों के बीच विजय के अपने खेमे में भी हलचल है। पार्टी के कुछ रणनीतिकारों को डर है कि अगर चुनाव से पहले राष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो TVK की स्वतंत्र और तीसरे विकल्प वाली छवि कमजोर हो सकती है।

विजय ने अब तक अपने राजनीतिक अभियान में तमिल पहचान और द्रविड़ नैरेटिव को प्रमुखता दी है। अगर NDA का हिस्सा बनते हैं तो आलोचक कह सकते हैं कि राजनीति की नई पार्टी भी आखिरकार पुरानी सियासत के गठबंधन खेल में उतर आई।

तमिलनाडु की राजनीति में अगला सीन

फिलहाल यह कहानी अभी अधूरी है। एक तरफ BJP का ऑफर है दूसरी तरफ विजय की महत्वाकांक्षा। राजनीति की इस फिल्म में क्लाइमेक्स अभी बाकी है।

क्या विजय गठबंधन कर सियासी शॉर्टकट अपनाएंगे या फिर अकेले मैदान में उतरकर सीधा मुख्यमंत्री बनने का दांव खेलेंगे?  तमिलनाडु की जनता अब इस सियासी फिल्म का अगला सीन देखने का इंतजार कर रही है। और राजनीति का अनुभव कहता है यहां स्क्रिप्ट आखिरी रात तक बदल सकती है।

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