
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मंगलवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। बजट भाषण की शुरुआत सरकार की आर्थिक उपलब्धियों से हुई, जिसमें यूपी को देश की ग्रोथ स्टोरी का इंजन बताया गया।
खन्ना ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ राजनीति नहीं, प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट का पावरहाउस बन चुका है।
65% Mobile Production: “Made in UP, Used in India”
वित्त मंत्री ने बताया कि देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का 65 प्रतिशत हिस्सा अब उत्तर प्रदेश में हो रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्लस्टर को इसका केंद्र बताया गया।
यह बयान सीधे तौर पर यूपी को भारत की मैन्युफैक्चरिंग कैपिटल के रूप में स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है।
₹15 लाख करोड़ निवेश: आंकड़ों की राजनीति
सुरेश खन्ना ने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश में ₹15 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आया है। सरकार के मुताबिक यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री और रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। हालांकि विपक्ष इन आंकड़ों को लेकर पहले से ही सवाल उठाता रहा है।
GSDP में 13.4% की छलांग
बजट भाषण के दौरान यह भी बताया गया कि 2024-25 के लिए यूपी का GSDP ₹30.25 लाख करोड़ आंका गया है। जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 13.4% की वृद्धि दर्शाता है। सरकार इसे “Double Engine Growth Model” की सफलता बता रही है।

बजट से पहले सियासी तकरार
बजट से पहले ही राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर इसे “लगातार 10वां सर्वसमावेशी बजट” बताया और कहा कि यह 25 करोड़ प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं का प्रतीक है।
वहीं सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने तीखा हमला करते हुए कहा कि यह बजट किसानों, युवाओं, मजदूरों और दलितों से जुड़ा नहीं होगा।
सरकार कहती है – मोबाइल हम बना रहे हैं, विपक्ष पूछता है – रोज़गार किसके हाथ में है? यूपी का बजट हर साल की तरह इस बार भी आंकड़ों और आरोपों के बीच फंसा नजर आता है।
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