
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ऐसा दांव खेलने जा रहे हैं, जिसने पूरे US pharma ecosystem की नींद उड़ा दी है।
फरवरी में लॉन्च होने जा रही सरकारी वेबसाइट TrumpRx को अमेरिका में सस्ती दवाओं का “digital solution” बताया जा रहा है, लेकिन इसके असर को लेकर दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर्स में बेचैनी साफ दिख रही है।
सरकार का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म आम अमेरिकियों को महंगी दवाओं के बोझ से राहत देगा, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह कदम बाजार में असंतुलन पैदा कर सकता है।
क्या है TrumpRx?
TrumpRx एक government-backed online medicine platform होगा, जहां लोग दवाइयां सीधे कम कीमत पर खरीद सकेंगे।
व्हाइट हाउस के अनुसार:
- 10+ pharma कंपनियों से समझौते
- Bulk pricing model
- Middlemen हटाकर direct access
यानी pharmacy chain और local medical stores की भूमिका सीधे तौर पर कम हो सकती है।
Pharma कंपनियां और मेडिकल स्टोर्स क्यों घबराए?
US में दवाओं की बिक्री का बड़ा हिस्सा retail pharmacies और private distributors के जरिए होता है।
TrumpRx के आने से Private medical stores की sales घट सकती हैं, Price control सरकार के हाथ में जा सकता है। Pharma कंपनियों का profit margin squeeze होगा।
यही वजह है कि कई कंपनियां इसे state-run competition मान रही हैं।
डेमोक्रेट्स ने उठाए वैधता पर सवाल
TrumpRx पर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। डेमोक्रेट सांसद Dick Durbin, Elizabeth Warren और Peter Welch ने Health & Human Services के Inspector General को पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं कि मरीजों को किन platforms पर भेजा जाएगा? क्या doctors की भूमिका bypass होगी? गलत दवा या इलाज में देरी का जोखिम तो नहीं?

उनका आरोप है कि यह मॉडल direct-to-consumer healthcare को असुरक्षित बना सकता है।
अमेरिका में दवाएं इतनी महंगी क्यों?
सरकारी सर्वे के मुताबिक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा medicine buyer है। टेनेसी में कराए गए सर्वे में खुलासा हुआ कि दवाओं की कीमतें औसतन 51% तक बढ़ चुकी हैं। लाखों लोग इलाज afford नहीं कर पा रहे। Cost के कारण इलाज छोड़ने से मौत के मामले सामने आए।
Trump सरकार इसी आंकड़े को TrumpRx का नैतिक आधार बता रही है।
राहत या जोखिम?
TrumpRx को समर्थक patient-first reform बता रहे हैं, जबकि critics इसे market distortion कह रहे हैं। फिलहाल यह साफ है कि TrumpRx सिर्फ वेबसाइट नहीं, बल्कि US healthcare power structure को चुनौती है।
अब देखना यह होगा कि यह प्रयोग मरीजों के लिए वरदान बनता है या दवा बाजार के लिए नया संकट।
