
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर एक बार सोशल मीडिया की तलवार खींच ली है। इस बार उनका निशाना है – Antifa (Anti-Fascist) और डिक्लेरेशन है – “Terrorist Organization घोषित करता हूं!”
उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा- “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है…”
(हाँ, वो ‘खुशी’ भी लिखना नहीं भूले)
Antifa कौन है? हीरो या विलेन? Depends on कौन पूछ रहा है
Antifa कोई संगठित पार्टी या संस्था नहीं है, बल्कि एक विचारधारा है — जिसका मक़सद है फासीवाद, नस्लवाद और दक्षिणपंथी कट्टरता के खिलाफ आवाज़ उठाना। ये लोग आमतौर पर काले कपड़े, हेलमेट, और मास्क पहनते हैं।
ताकि पहचान छिपी रहे, और यूनिफाइड डर बना रहे। इसे कहते हैं “Black Bloc” स्ट्रेटेजी। कई बार ये शांतिपूर्ण विरोध करते हैं, तो कई बार टकराव की स्थितियाँ भी बनती हैं।
राजनीति का असली रंग? काला या लाल?
ट्रंप के इस फैसले के पीछे राजनीतिक लाभ की बू भी आ रही है। 2025 के चुनाव नज़दीक हैं, और अमेरिका की राजनीति पहले से ही दाएं-बाएं (literally) बंटी हुई है।
Antifa को आतंकवादी ठहराना ट्रंप के लिए एक “Red Meat for the Right” जैसा काम कर सकता है — यानी अपने दक्षिणपंथी बेस को और मजबूत करना।
“फंडिंग की भी जांच होनी चाहिए” – ट्रंप का अगला प्लान
ट्रंप यहीं नहीं रुके। उन्होंने लिखा- “मैं यह भी सिफारिश करूंगा कि एंटीफ़ा को फंड करने वालों की जांच हो…”
मतलब अब Antifa को फंड देने वाला कोई भी मेमे-पेज एडमिन भी शक के घेरे में आ सकता है।

इतिहास से लेकर हेडलाइंस तक – Antifa की कहानी
Antifa की जड़ें 1920s और 30s की यूरोपीय फासीवादी विरोधी मूवमेंट्स में हैं। पश्चिम जर्मनी से लेकर अमेरिका तक, ये आंदोलन कभी लाइब्रेरी में पढ़ते दिखते हैं, तो कभी रायट गियर पहनकर सड़कों पर दिखते हैं।
दुविधा का लोकतंत्र – विरोध करने वाला आतंकवादी कैसे?
Antifa समर्थकों का कहना है कि वे हेट के खिलाफ खड़े होते हैं, लेकिन सरकार कह रही है – “तुम विरोध नहीं कर रहे, तुम डरा रहे हो!”
यही दुविधा है — विरोध बनाम विध्वंस
“काले कपड़े वाले अब डर का नया चेहरा हैं?”
“अगर आप सत्ता के विरोध में बोलते हैं तो आप एक्टिविस्ट हैं… लेकिन अगर आप ज़ोर से बोलते हैं, तो अब आप आतंकवादी हैं?”
ट्रंप की यह घोषणा जहां उनके समर्थकों को मज़बूत करेगी, वहीं राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी और गहरा कर देगी।
Antifa के काले झंडे अब और भी ज्यादा दिखाई देंगे — चाहे विरोध में हों या ट्रंप के बयानों के जवाब में।
कन्फ्यूज हो जाते हैं की ये एशिया कप है या जांच आयोग?
