Aravalli के बाद Chambal पर कैंची! घड़ियाल अभ्यारण्य से 732 हेक्टेयर बाहर

राजस्थान में पर्यावरण की “रेड लाइन्स” अब काग़ज़ों पर रह गई हैं। पहले अरावली पर्वतमाला और अब राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य।सरकार के ताज़ा फैसले ने वो सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ जंगलों के नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के हैं। कोटा में हैंगिंग ब्रिज से लेकर कोटा बैराज तक का 732 हेक्टेयर इलाका अब चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य से मुक्त कर दिया गया है। यानी जिस ज़मीन को दशकों तक वन्यजीवों का घर माना गया, वहां अब इंसानी कंक्रीट को वैधता मिल गई है। 1972 का कानून, 2025 का…

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