कभी आसमान में चक्कर काटते गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी कहलाते थे। वे मृत शरीर खाते थे, जीवितों पर हमला नहीं करते थे। आज हालात उलटे हैं। जंगल के असली गिद्ध कम होते जा रहे हैं, और शहरों में रूपक वाले गिद्धों की आबादी रिकॉर्ड तोड़ रही है। जटायू केंद्र में सन्नाटा चित्रकूट में बने जटायू गिद्ध संरक्षण व प्रजनन केंद्र का मकसद था लाल गर्दन वाले गिद्धों की संख्या बढ़ाना। लक्ष्य रखा गया था कि 20 साल में 40 से 50 जोड़े तैयार होंगे। सहयोग में Bombay Natural History Society…
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