हीरो नहीं, जिम्मेदार इंसान बनो बेटा!

कभी कहा जाता था “बेटी को संभालकर रखो”, अब समझदार लोग कहते हैं “बेटे को समझदार बनाओ।” समाज evolve हो रहा है। ऐसे में एक पिता की भूमिका सिर्फ कमाने वाले की नहीं, बल्कि character builder की भी है। बेटे को यह सिखाना जरूरी है कि ताकत का मतलब दबाना नहीं, संभालना होता है। 1. Respect is the Real Power सबसे पहली नसीहत Respect सबके लिए। चाहे दोस्त हो, सहपाठी हो, colleague हो या partner। Consent क्या होता है, boundaries क्या होती हैं ये बातें घर से ही शुरू होती हैं। हीरो वही…

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“जाति मेरे जूते की नाप है, दिमाग की नहीं” – युवाओं के लिए नया मंत्र

सुनो,अगर तुम्हारी पहचान तुम्हारे दिमाग से नहीं, तुम्हारी जाति से तय हो रही है, तो समझो कि समाज ने तुम्हें इंसान नहीं, फाइल बना दिया है। “जाति मेरे जूते की नाप है, दिमाग की नहीं” ये मैंने कोई नारा नहीं दिया। यह मानसिक आज़ादी का ऐलान है। जूते की नाप छोटी हो सकती है, बड़ी हो सकती है। बदल भी सकती है। लेकिन दिमाग? वह तो सीमाओं को तोड़ने के लिए बना है, उनमें कैद होने के लिए नहीं। युवाओं से सीधी बात तुम्हारी generation के पास इंटरनेट है, AI है,…

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