भारत में भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान और राजनीति का हथियार भी रही है. खासकर South India और हिंदी का रिश्ता दशकों से टकराव भरा रहा है.कभी रेलवे स्टेशन पर हिंदी बोलने का दबाव, कभी सरकारी फॉर्म — और अब फिर वही पुरानी बहस सुर्खियों में है. इस बार चिंगारी दी है तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK Stalin के बयान ने. “न तब जगह थी, न अब है, न कभी होगी” चेन्नई में आयोजित ‘भाषा शहीद दिवस’ के मौके पर स्टालिन ने हिंदी विरोधी आंदोलन के शहीदों को…
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