मिडिल ईस्ट की जंग में मिसाइलें उड़ रही थीं, शहरों में सायरन बज रहे थे और खुफिया एजेंसियां लगातार चेतावनी दे रही थीं। उसी वक्त ईरान की सत्ता के सबसे ऊंचे पद पर बैठे शख्स के सामने भी एक विकल्प था—बंकर में छिप जाओ, जान बचाओ। लेकिन Ali Khamenei ने यह रास्ता चुनने से इनकार कर दिया। उनके प्रतिनिधि ने जो कहानी सुनाई, वह राजनीति से ज्यादा एक प्रतीक बन गई—सत्ता, जिद और संदेश की कहानी। “जब जनता के पास शेल्टर नहीं, तो मैं क्यों जाऊं?” ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल…
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