मोदी जी तो बड़े वो निकले! Mango आदमी का चैन से धुआँ उड़ाना भी गुनाह

यार, पहले वक्त था — थक जाओ, स्ट्रेस हो, गर्मी हो या सर्दी — एक सिगरेट और सब ठीक। अब? सिगरेट ऐसे महँगी होगी कि बजट से ज्यादा, टेंशन से ज्यादा खर्चा लगेगा। सोचो — 100 रुपये की सिगरेट पहले आराम देती थी, अब वो 150–200 रुपये हो जाए… क्या मन करेगा कि “जिंदगी के धुएँ” फूँके? घर, किराया, बिजली — सब पहले से महँगे थे, अब सिगरेट भी जोड़ दो पहले से EMI, बिल, किराया, बच्चों की पढ़ाई — सब खर्च बढ़ रहे हैं। और अब सिगरेट जैसे “छोटे…

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