लखनऊ की चमकती सड़कों के नीचे जैसे कोई चुपचाप साज़िश पल रही थी… ऊपर रिबन कट रहा था, नीचे मिट्टी खिसक रही थी। सिर्फ दो दिन — और “ड्रीम प्रोजेक्ट” ने खुद ही अपना पोस्टमार्टम लिख दिया।ये कोई साधारण गड्ढा नहीं, ये सिस्टम के आत्मविश्वास में पड़ा वो छेद है, जो हर बारिश में चौड़ा होता जाता है। उद्घाटन से धंसान तक: 48 घंटे की कहानी 13 मार्च को बड़े मंच, बड़े चेहरे और बड़ी उम्मीदों के बीच ग्रीन कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ। लेकिन 48 घंटे भी नहीं बीते कि…
Read More