भोपाल की एक शादी… जहां ढोल बजना था, वहां पुलिस की जीप आकर रुक गई. जहां पंडित मंत्र पढ़ने वाला था, वहां पुलिस ने हथकड़ी पढ़ दी. और फिर जो दृश्य सामने आया वह किसी फिल्म का क्लाइमेक्स नहीं, बल्कि असल जिंदगी की कड़वी पटकथा था. मेहंदी लगे हाथ…चेहरे पर हल्दी…गले में जयमाला…और वही दुल्हन कुछ देर बाद थाने के दरवाजे पर खड़ी थी. उसकी आवाज कांप रही थी. “साहब… अगर छोड़ नहीं सकते तो कस्टडी में ही फेरे करा दो.” मंडप से सीधे पुलिस की गाड़ी मामला मध्य प्रदेश की राजधानी…
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