जब सरहदों पर गोलियां चलती हैं, तब वॉल स्ट्रीट पर कैलकुलेटर गर्म हो जाते हैं। जंग सिर्फ टैंक और मिसाइल से नहीं लड़ी जाती—यह करेंसी, कमोडिटी और कॉन्फिडेंस की भी लड़ाई होती है। और इस बार, बारूद की गंध के बीच एक खिलाड़ी सबसे ज्यादा चमक रहा है—डॉलर। सवाल यह है कि ये असली ताकत है या ‘क्राइसिस का कॉस्मेटिक ग्लो’? “डॉलर का दबदबा”: कमजोरी नहीं, उल्टा उछाल United States Dollar इस वक्त गिर नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल अनिश्चितता का ‘VIP पास’ बन चुका है। 17 मार्च 2026 के आंकड़े बताते…
Read More