सिविल लाइन की उन शांत गलियों को क्या पता था कि आज वहां ‘मंजुल’ के बहाने शिक्षा के भविष्य का नया स्क्रिप्ट लिखा जाने वाला है। जब ‘गैंग्स ऑफ वसेपुर’ के लेखक और अभिनेता जीशान कादरी स्टेज पर चढ़े, तो माहौल सिर्फ तालियों का नहीं, बल्कि उन उम्मीदों का था जो अक्सर छोटे शहरों के क्लासरूम में दम तोड़ देती हैं। क्या हमने कभी सोचा है कि हमारे बच्चे सिर्फ मार्कशीट छापने वाली मशीन हैं या उनमें कोई ‘जीशान’ भी छिपा है? दीप प्रज्ज्वलन तो एक रस्म थी, असली आग…
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