दिवाली पर बुझा हंसी का दीया: असरानी का निधन- हंसी छोड़ गए, आंसू दे गए

दिवाली, जब पूरा देश रौशनी में डूबा था, बॉलीवुड के आंगन में अंधेरा उतर आया। 84 साल के गोवर्धन असरानी — जिन्हें हम प्यार से “हंसी का हैंडलिंग एक्सपर्ट” कह सकते हैं — ने दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार शाम 4 बजे जुहू के आरोग्य निधि अस्पताल में अंतिम सांस ली, और शाम होते-होते बिना शोरगुल के, शास्त्री नगर सांताक्रूज में अंतिम संस्कार भी हो गया। No media circus, no RIP hashtags in रियल-टाइम। बस सादगी, जैसा असरानी जी की ज़िंदगी रही। “Don’t Disturb the Diwali Mood” – असरानी…

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शराबी 1964: देव आनंद और मधुबाला का क्लासिक ड्रामा

1964 में बनी शराबी फिल्म, जो हिंदी सिनेमा की एक अनमोल धरोहर है, राज ऋषि के निर्देशन में आई थी। इस फिल्म में देव आनंद और मधुबाला ने अपनी अदाकारी से दिल जीत लिया। मदन मोहन का संगीत और राजेन्द्र कृष्ण के गीतों ने इसे और भी खास बना दिया। कहानी फ़िल्म की कहानी केशव (देव आनंद) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक शराबी है और गरीबी की मार झेल रहा है। पिता के निधन के बाद वह खुद को बदलने का वादा करता है, लेकिन जीवन की कठोरता उसे…

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नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स: शाहरुख बने ‘जवान’, रानी बनीं ‘बेस्ट’, ‘कटहल’ बनीं हिंदी की सरताज

हर साल की तरह इस बार भी नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का मंच चमका – कुछ उम्मीदों ने उड़ान भरी तो कुछ फैसलों पर जनता की भौंहें तनी। पर एक बात तो साफ़ है – इस साल के अवॉर्ड्स में ‘विविधता’ का डंका बजा। बेस्ट हिंदी फिल्म – ‘कटहल’: फल नहीं, फिल्म है जनाब! नेटफ्लिक्स पर आई ‘कटहल: द जैकफ्रूट मिस्ट्री’ ने अपनी अनोखी स्क्रिप्ट और सामाजिक तंजों की बदौलत इस साल का बेस्ट हिंदी फिल्म अवॉर्ड जीत लिया। कटहल, जो पहले मज़ाक समझी गई थी, अब खुद एक सम्मानित नाम…

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राजा रघुवंशी हत्याकांड पर फिल्म “हनीमून इन शिलांग” का ऐलान

कहते हैं, “रियल लाइफ में जो ड्रामा है, वो रीमेक की ज़रूरत नहीं छोड़ता”, और ऐसा ही कुछ हुआ राजा रघुवंशी हत्याकांड के साथ। एक हाई-प्रोफाइल मामला जो इंदौर से लेकर शिलांग तक सोशल मीडिया और न्यूज़ हेडलाइंस पर छाया रहा, अब बन रहा है बॉलीवुड फिल्म। डायरेक्टर ने बजाया क्लैपबोर्ड – बिना राइट्स नहीं कर रहे कोई “क्राइम सीन” डायरेक्टर एस.पी. निम्बावत, जो इससे पहले कई रियलिस्टिक फिल्में बना चुके हैं, अब “हनीमून इन शिलांग” के जरिए इस केस को पर्दे पर लाने वाले हैं।और नहीं! उन्होंने कोई चोरी-छिपे…

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दिल दिया दर्द लिया रेट्रो रिव्यू: जब दिलीप कुमार का दिल टूटा और दर्द मिला

1966 की फिल्म दिल दिया दर्द लिया दिलीप कुमार का वो इमोशनल प्रोजेक्ट था, जिसमें उन्होंने ना सिर्फ एक्टिंग की बल्कि डायरेक्शन में भी हाथ डाला। सोचा था “हीथक्लिफ़” बन कर इतिहास रचेंगे, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इतिहास ही ग़ायब हो गया। रेट्रो रिव्यू: “वो कौन थी?” – और आज तक किसी को नहीं पता फिल्म का नारा होना चाहिए था –“दिल दिया, दर्द लिया… पर टिकट के पैसे वापस नहीं मिले।” वुथरिंग हाइट्स इन देसी टाइप एमिली ब्रोंटे के डार्क, इंटेंस और पागलपन से भरे उपन्यास Wuthering Heights को…

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‘एक फूल दो माली’ रिव्यू: बलराज साहनी और संजय खान की क्लासिक

1969 में रिलीज़ हुई ‘एक फूल दो माली’ एक ऐसी भावनात्मक फिल्म है जो अब भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। राज खोसला के निर्देशन में बनी इस फिल्म में प्यार, त्याग, मातृत्व और पितृत्व के भावों को बेहद मार्मिक तरीके से पेश किया गया है। मुख्य कलाकारों की अदाकारी बलराज साहनी ने एक संघर्षशील पिता के रूप में दिल को छू लेने वाला परफॉर्मेंस दिया। संजय खान, एक फौजी प्रेमी के रूप में प्रभावशाली लगे, जो हालात से हार नहीं मानता। साधना ने अपने शांत लेकिन दृढ़ किरदार…

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बॉलीवुड ने खोया समाज का सिनेमा सिपाही: पार्थो घोष अब हमारे बीच नहीं

हिंदी सिनेमा ने अपने एक बेहतरीन और दमदार कहानीकार को खो दिया है। 90 के दशक में गंभीर और सामाजिक संदेशों से भरपूर फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक पार्थो घोष का 75 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से निधन हो गया। अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने इस दुखद खबर की पुष्टि की, जिसके बाद फिल्म इंडस्ट्री और उनके फैंस में शोक की लहर दौड़ गई। प्यार किया तो मर्डर से क्या डर-शिलांग जैसी 8 कहानियां पार्थो घोष का सिनेमा: कंटेंट और कमर्शियल का बेमिसाल मेल पार्थो घोष ने बॉलीवुड में…

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