रमजान: सिर्फ रोज़ा नहीं, रूह की ‘रीसेट’ का महीना

रमजान (Ramadan) इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है लेकिन इसे सिर्फ एक धार्मिक रस्म समझ लेना बड़ी भूल होगी। यह महीना असल में इंसान को ‘रीसेट’ करने का मौका देता है। जैसे मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाए तो उसे चार्ज करना पड़ता है, वैसे ही इंसान की रूह भी दुनिया की दौड़ भाग में थक जाती है। रमजान वही चार्जिंग स्टेशन है। आज के दौर में, जहां सेल्फी ज्यादा और सेल्फ अकाउंटेबिलिटी कम है, वहां रोज़ा हमें खुद से सवाल पूछना सिखाता है क्या मैं सिर्फ दिखावे का धार्मिक…

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