सोशल मीडिया के इस स्वर्ण युग में पत्रकारिता सिर्फ खबरें देने का माध्यम नहीं रही, बल्कि इमोशनल एंगेजमेंट का आर्टफॉर्म बन चुकी है।अब पत्रकार कितना सच बोलते हैं, उससे ज़्यादा ज़रूरी है — उनकी पोस्ट पर कितने लोग “वाह उम्दा विश्लेषण” कॉमेंट कर रहे हैं! हर पोस्ट के नीचे वही कॉपी-पेस्ट श्रद्धांजलि स्टाइल कॉमेंट्स: “आपकी लेखनी को सलाम”, “आपने तो पूरी सरकार हिला दी”, “आपसे बेहतर कोई नहीं!” ऐसा लगने लगा है जैसे पत्रकार अब सिर्फ सरकार से ही नहीं, अपने फॉलोअर्स से भी तारीफ की उम्मीद रखने लगे हैं…
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