बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में जारी हलचल के बीच सत्ता परिवर्तन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ करीब 10 मंत्रियों के भी शपथ ग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, राज्यसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल के विस्तार और व्यापक फेरबदल की भी तैयारी बताई जा रही है।
3 जून को हो सकता है शपथ ग्रहण समारोह
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और 3 जून को नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार शपथ ले सकते हैं। शुरुआती चरण में सीमित संख्या में मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है, जबकि शेष मंत्रिमंडल का विस्तार 18 जून के बाद किए जाने की संभावना है।
कैबिनेट में 50 प्रतिशत तक नए चेहरों की चर्चा
राज्य सरकार में संभावित बदलाव के साथ मंत्रिमंडल में भी बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि नई कैबिनेट में लगभग 50 प्रतिशत तक नए चेहरों को जगह मिल सकती है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल के गठन पर मंथन जारी है।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर टिकी निगाहें
शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बैठक के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर औपचारिक घोषणा की जा सकती है। इसके साथ ही शपथ ग्रहण कार्यक्रम की तारीख और मंत्रिमंडल की रूपरेखा पर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी मजबूत रहेगा सिद्धारमैया का प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता का औपचारिक हस्तांतरण होने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का प्रभाव राज्य की राजनीति और कांग्रेस संगठन में बना रहेगा। पिछड़े वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए पार्टी नेतृत्व भी उनके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहता।
राज्यसभा के बजाय राज्य की राजनीति में सक्रिय रहने का फैसला
सिद्धारमैया द्वारा राज्यसभा की संभावित भूमिका स्वीकार करने के बजाय कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय बने रहने का निर्णय कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। माना जा रहा है कि वे राज्य की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी भूमिका बरकरार रखना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री बनने के बाद होगी असली परीक्षा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक नियंत्रण के साथ-साथ पार्टी के भीतर विभिन्न शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। उन्हें सरकार के संचालन के साथ संगठनात्मक समीकरणों को भी साधना होगा, ताकि कांग्रेस की एकजुटता बनी रहे।
