
मिडिल ईस्ट इन दिनों किसी न्यूज़ चैनल की ब्रेकिंग पट्टी नहीं, बल्कि सचमुच बारूद का मैदान बना हुआ है। मिसाइलें आसमान चीर रही हैं और हर धमाके के साथ हजारों किलोमीटर दूर बैठे परिवारों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। रविवार को जैसे ही खबर फैली कि सऊदी अरब में ईरानी मिसाइल हमले में एक भारतीय की मौत हो गई, सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्टूडियो तक सनसनी दौड़ गई। लेकिन रियाद से आई ताजा पुष्टि ने इस डर को ठंडा कर दिया है।
मौत की खबर निकली हवा, दूतावास ने तोड़ी अफवाह
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित भारतीय दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी भी भारतीय नागरिक की मौत नहीं हुई है।
अल खर्ज के रिहायशी इलाके में हुए मिसाइल हमले के बाद शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दो विदेशी नागरिक मारे गए हैं जिनमें एक भारतीय बताया जा रहा था। लेकिन दूतावास ने जमीनी स्तर पर जांच के बाद इस खबर को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कूटनीतिक भाषा में आया यह बयान असल में उन हजारों परिवारों के लिए राहत की सांस है जिनके अपने लोग खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं।
एक भारतीय घायल, लेकिन खतरे से बाहर
हमले के दौरान एक भारतीय नागरिक जरूर घायल हुआ है। लेकिन राहत की बात यह है कि उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। भारतीय दूतावास के काउंसलर वाई साबिर खुद अल खर्ज पहुंचे और अस्पताल जाकर घायल व्यक्ति से मुलाकात की। मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि इलाज जारी है और सऊदी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है।

जंग के बीच भारतीयों के लिए एक्टिव हुआ कंट्रोल रूम
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय मिशन ने 24 घंटे का कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है। भारत के राजदूत सुहेल एजाज खान ने डिजिटल बातचीत के जरिए भारतीय समुदाय को भरोसा दिलाया कि किसी भी आपात स्थिति में दूतावास तुरंत मदद करेगा।
साथ ही भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन करें और अफवाहों से दूर रहें।
खाड़ी में लाखों भारतीय, हर खबर से बढ़ती धड़कन
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। इसलिए जब भी वहां से मिसाइल, हमला या युद्ध जैसी खबर आती है, भारत में बैठे परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि जेद्दा और मदीना की फ्लाइट सेवाएं सामान्य हो चुकी हैं और हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। लेकिन मिडिल ईस्ट की मौजूदा भू-राजनीति को देखते हुए यह इलाका अभी भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
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